भारतीय शेयर बाजार में तेजी के दौर के बीच अब सेंसेक्स के प्रदर्शन को लेकर एक अलग तस्वीर सामने आ रही है। सेंसेक्स को अपने पिछले रिकॉर्ड उच्च स्तर से 697 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस दौरान वह नया रिकॉर्ड उच्च स्तर नहीं बना पाया है। इसे हाल के वर्षों में बाजार की लंबी कमजोरी के दौर के तौर पर देखा जा रहा है।
सबसे ज्यादा चिंता दो साल के रिटर्न को लेकर है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2026 में करीब 37 प्रतिशत कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स का दो साल का रिटर्न नकारात्मक रहा। अगर यह आंकड़ा बरकरार रहता है तो यह 2012 के बाद सबसे कमजोर दो वर्षीय प्रदर्शन में शामिल होगा।
दो साल की अवधि को निवेशकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे बाजार की मध्यम अवधि की वास्तविक तस्वीर सामने आती है। किसी एक दिन की तेजी या गिरावट के बजाय लंबे समय का रिटर्न बाजार की दिशा को बेहतर तरीके से दिखाता है।
हालांकि सेंसेक्स का रिकॉर्ड हाई न बनाना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि बाजार में हर निवेशक को नुकसान हुआ है। अलग-अलग कंपनियों और क्षेत्रों का प्रदर्शन काफी अलग हो सकता है। कुछ शेयरों ने इस दौरान बाजार से बेहतर रिटर्न दिया है, जबकि कई बड़े शेयर दबाव में रहे हैं।
बाजार की मौजूदा स्थिति में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरें, विदेशी निवेश, कंपनियों की कमाई और भू-राजनीतिक घटनाक्रम अहम भूमिका निभा रहे हैं।
निवेशकों के लिए ऐसे समय में जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय कंपनी के मूलभूत प्रदर्शन, जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना ज्यादा जरूरी है। शेयर बाजार में पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता।

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