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भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई रफ्तार, 67 अरब डॉलर निवेश लक्ष्य पर जोर

 


नई दिल्ली। भारत और जापान के बीच आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देने की कोशिश तेज हो गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की जापान यात्रा के दौरान निवेश, व्यापार, विनिर्माण और अत्याधुनिक तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। जापान ने अगले दशक में भारत में करीब 10 लाख करोड़ येन यानी लगभग 67 अरब डॉलर के निजी क्षेत्र के निवेश का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य 2025-2035 की अवधि के लिए तय किया गया है।



भारत अब जापानी कंपनियों की संख्या भी तेजी से बढ़ाना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में सक्रिय जापानी कंपनियों की संख्या करीब 1,500 से बढ़ाकर 3,000 करने का लक्ष्य रखा है। पीयूष गोयल ने जापानी उद्योग जगत से भारत में निवेश और स्थानीय विनिर्माण बढ़ाने की अपील की है।


दोनों देशों की नजर अब केवल पारंपरिक वाहन और इंजीनियरिंग क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालक, महत्वपूर्ण खनिज, बैटरी, ऊर्जा और अगली पीढ़ी की गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की संभावना है। गोयल ने जापानी कंपनियों से भारत में अनुसंधान एवं विकास केंद्र, वैश्विक क्षमता केंद्र और नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने को कहा है।


भारत-जापान द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 27.5 अरब डॉलर रहा। जापान भारत के प्रमुख प्रत्यक्ष विदेशी निवेश स्रोतों में पांचवें स्थान पर है।


गोयल ने जापान के साथ मौजूदा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को और आधुनिक बनाने तथा उसके दायरे का विस्तार करने की भारत की इच्छा भी जताई है। ऐसे में आने वाले वर्षों में जापान भारत के विनिर्माण और तकनीकी विकास का एक और महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है।

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