नई दिल्ली। नौकरी या कारोबार से रिटायर होने के बाद नियमित आय सबसे बड़ी चिंता होती है। यदि आप चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने 50 हजार रुपये की आय मिलती रहे, तो इसके लिए समय रहते मजबूत वित्तीय योजना बनाना जरूरी है।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, इसके लिए 4 प्रतिशत निकासी नियम (फोर परसेंट रूल) को एक व्यावहारिक आधार माना जाता है। इस नियम के मुताबिक, यदि आप अपनी कुल जमा पूंजी का केवल 4 प्रतिशत सालाना खर्च करते हैं, तो निवेश लंबे समय तक टिक सकता है।
इस हिसाब से हर महीने 50 हजार रुपये यानी सालाना 6 लाख रुपये की आय के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड होना चाहिए। इस राशि को उचित निवेश में रखने पर नियमित आय मिल सकती है और मूल पूंजी पर दबाव भी कम पड़ता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि महंगाई, बढ़ते चिकित्सा खर्च, जीवनशैली और निवेश पर मिलने वाले वास्तविक रिटर्न को ध्यान में रखकर लक्ष्य तय करना चाहिए। इसलिए कई मामलों में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का फंड बनाना भी आवश्यक हो सकता है।
वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि जितनी जल्दी निवेश की शुरुआत की जाए, उतना ही कम मासिक निवेश करके बड़ा रिटायरमेंट कोष तैयार किया जा सकता है। नियमित निवेश, अनुशासित बचत और लंबी अवधि की योजना ही आर्थिक रूप से सुरक्षित बुढ़ापे की सबसे मजबूत नींव है।

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