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दुनिया में भारत का ‘फैब-4’ मिशन: चीन से रूस, अमेरिका से जापान तक एक साथ साधे चार मोर्चे

प्रणव बजाज

नई दिल्ली। भारत ने इस समय कूटनीति का ऐसा मॉडल अपनाया है, जिसमें एक साथ सुरक्षा, ऊर्जा, निवेश और तकनीक—चारों मोर्चों पर बड़े साझेदारों से सीधा संवाद किया जा रहा है। इसे अब भारत की रणनीतिक ‘फैब-4’ कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि चार प्रमुख भारतीय अधिकारियों ने अलग-अलग देशों में पहुंचकर एक ही व्यापक लक्ष्य—राष्ट्रीय हितों को मजबूत करने—पर काम किया है। 



सबसे संवेदनशील मोर्चा चीन है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत की। 25वें विशेष प्रतिनिधि संवाद में दोनों पक्षों ने सीमा प्रश्न के दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान और सीमा पर स्थिरता बनाए रखने की दिशा में बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। अब बातचीत का दायरा केवल सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक सहयोग और निवेश जैसे मुद्दे भी इसमें जगह बना रहे हैं। 


दूसरा मोर्चा रूस है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मास्को यात्रा में ऊर्जा आपूर्ति और दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। रूस भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण बना हुआ है। 


तीसरा मोर्चा अमेरिका और कनाडा से जुड़ा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की यात्रा का फोकस निवेश आकर्षित करने और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने पर रहा। वहीं चौथा मोर्चा जापान है, जहां वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निवेश, उन्नत तकनीक और विनिर्माण सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। 


आखिर मास्टरप्लान क्या है?


भारत किसी एक शक्ति खेमे के साथ खड़े होने के बजाय हर बड़े शक्ति केंद्र से अपने हित के मुताबिक संबंध साध रहा है। चीन से सीमा स्थिरता और निवेश, रूस से ऊर्जा, अमेरिका से पूंजी और वित्तीय सहयोग तथा जापान से तकनीक और विनिर्माण—चारों दिशाओं को जोड़कर भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता मजबूत करना चाहता है।


आगामी वैश्विक बैठकों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच यह रणनीति भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली को एक साथ सीमा सुरक्षा, ऊर्जा उपलब्धता, विदेशी निवेश और तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करनी है।


यानी संदेश साफ है—भारत किसी एक दरवाजे पर निर्भर नहीं रहना चाहता; वह एक साथ कई दरवाजे खोलकर अपनी सौदेबाजी की ताकत बढ़ा रहा है।

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