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तिब्बत में फिर झील फटी, नेपाल में गांव खाली कराने का अलर्ट; 469 मौतें, 1500 से ज्यादा लापता



काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़ और भूस्खलन की तबाही के बीच अब एक नई झील के उफनने से हालात और गंभीर हो गए हैं। तिब्बत में आपदा के बाद बनी झील का पानी बहने लगा है, जिसके बाद चीन ने प्रभावित क्षेत्र में बचाव अभियान रोक दिया और टीमों को पीछे हटने के निर्देश दिए। नेपाल में भी संभावित नए जलसैलाब के खतरे को देखते हुए नदी किनारे के इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई है। 


इस हिमालयी आपदा में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 469 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 1500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में अकेले 469 मौतें दर्ज हुई हैं और तिब्बत के चीन के अधिकार वाले क्षेत्र में भी मौतें हुई हैं। 


सबसे बड़ी चिंता अब उस झील को लेकर है, जो मलबे और भूस्खलन के कारण बनी है। पानी का दबाव बढ़ने से इसके और फैलने या अचानक टूटने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसी स्थिति में नीचे की ओर बसे गांवों और नदी घाटियों में अचानक तेज बाढ़ आ सकती है। इसी आशंका के चलते राहत एवं बचाव दलों को भी अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। 


यह आपदा बुधवार को ग्लेशियर के हिस्से के ढहने के बाद शुरू हुई, जिसके साथ बर्फ, पानी, चट्टान और मलबे का विशाल प्रवाह नदी घाटियों में उतर गया। नेपाल में सड़कें, पुल, गांव और जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। 


स्थिति अभी भी बेहद नाजुक है। राहत दल हजारों लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कई इलाकों में सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। अब नई झील का खतरा इस त्रासदी को दूसरी बड़ी आपदा में बदलने की आशंका बढ़ा रहा है।

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