मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रालय में लंबे समय से प्रतिनियुक्ति, अस्थायी नियुक्ति और मौखिक आदेश के आधार पर काम कर रहे 314 अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने ऐसी नियुक्तियां समाप्त कर संबंधित कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने का आदेश जारी किया है।
इस फैसले से मंत्रालय के उन पदों पर बैठे कर्मचारियों में हलचल बढ़ गई है, जिन्हें लंबे समय से प्रतिनियुक्ति या अन्य अस्थायी व्यवस्थाओं के जरिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हुई थीं। सरकार के आदेश का उद्देश्य मंत्रालय में नियुक्तियों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियमबद्ध बनाना बताया जा रहा है।
प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मंत्रालय में लंबे समय तक प्रतिनियुक्ति पर बने रहने को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। आरोप लगते रहे हैं कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपने मूल विभाग से हटकर लंबे समय तक मंत्रालय में प्रभावशाली पदों पर बने रहते हैं।
अब सरकार के आदेश के बाद इन कर्मचारियों को मूल विभाग में लौटना होगा। इससे मंत्रालय में कई पद खाली होंगे और वहां नई नियुक्तियों या नियमित प्रशासनिक व्यवस्था का रास्ता खुल सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों तक अस्थायी व्यवस्था के तहत मंत्रालय में काम करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की नियुक्तियां किस आधार पर जारी रहीं और उनकी समय-सीमा की नियमित समीक्षा क्यों नहीं हुई? सरकार का मौजूदा फैसला यदि नियमों के पालन को सख्ती से लागू करने की शुरुआत है, तो आने वाले दिनों में मंत्रालय की कार्यप्रणाली में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
यह कार्रवाई महाराष्ट्र प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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