7 महीने में 304 करोड़ की हेरोइन भारत पहुंची, ड्रोन से तस्करी ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
नई दिल्ली/जैसलमेर। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ छद्म युद्ध का एक और खतरनाक मोर्चा खोल दिया है। सीमा पार से अब केवल घुसपैठ ही नहीं, बल्कि ड्रोन के जरिए नशे और हथियारों की तस्करी भी तेजी से बढ़ रही है। राजस्थान में जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 69.808 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 304 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ मादक पदार्थों की तस्करी नहीं, बल्कि भारत की युवा पीढ़ी को नशे में धकेलकर सामाजिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित साजिश है।
ड्रोन बना पाकिस्तान का नया हथियार
पहले पंजाब में सक्रिय रहा ड्रोन नेटवर्क अब राजस्थान सीमा तक फैल चुका है। रात के अंधेरे में जीपीएस आधारित ड्रोन भारतीय सीमा में हेरोइन, हथियार और गोला-बारूद गिराकर लौट जाते हैं। स्थानीय तस्कर बाद में इन खेपों को उठाकर देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाते हैं।
दो मामलों ने बढ़ाई चिंता
हाल के महीनों में सामने आए दो बड़े मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांच में संकेत मिले हैं कि ड्रोन से गिराई गई खेप लेने के लिए स्थानीय युवाओं और तस्करी नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है। एजेंसियां अब यह भी जांच रही हैं कि कहीं इन नेटवर्कों का संबंध आतंकी संगठनों से तो नहीं है।
सिर्फ तस्करी नहीं, 'नार्को टेरर' की रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान लंबे समय से 'नार्को टेररिज्म' की रणनीति अपनाता रहा है। इसका उद्देश्य है—
भारत में नशे का जाल फैलाना।
युवाओं को अपराध और लत की ओर धकेलना।
तस्करी से मिलने वाले धन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में करना।
सीमा क्षेत्रों में अस्थिरता पैदा करना।
सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती
बीएसएफ, एनसीबी, पुलिस और खुफिया एजेंसियां ड्रोन रोधी तकनीक, रडार और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी को मजबूत कर रही हैं। इसके बावजूद छोटे आकार और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
तीखा सवाल
अगर सात महीने में 304 करोड़ रुपये की हेरोइन सीमा पार से आ सकती है, तो कितनी खेप ऐसी होगी जो पकड़ में ही नहीं आई?
ड्रोन अब केवल तकनीक नहीं, भारत के खिलाफ पाकिस्तान की नई छद्म युद्ध नीति बन चुका है। इसका जवाब केवल सीमा पर चौकसी से नहीं, बल्कि तस्करी के पूरे नेटवर्क, उसके वित्तपोषकों और स्थानीय मददगारों पर निर्णायक कार्रवाई से ही दिया जा सकता है। भारत को अब ड्रोन आतंक और नार्को नेटवर्क दोनों के खिलाफ समान कठोरता से लड़ाई लड़नी होगी।

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