एमवाय अस्पताल परिसर में घटिया निर्माण का बड़ा खुलासा, डीन कार्यालय के पीछे ही गड्ढों का साम्राज्य
गारंटी बोर्ड गायब, ठेकेदार पर मेहरबान लोक निर्माण विभाग; करोड़ों खर्च, मरीजों को मिली टूटी सड़क
प्रणव बजाज
प्रदेश के सबसे बड़े शासकीय चिकित्सा संस्थान महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (एमजीएम), एमवाय अस्पताल, चाचा नेहरू अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, कैंसर अस्पताल, नवीन ओपीडी, एमआरटीबी, नर्सिंग कॉलेज और मेडिकल छात्रावासों को जोड़ने वाली 10.55 करोड़ रुपए की आरसीसी सड़क निर्माण के कुछ ही समय बाद उखड़ने लगी है। जगह-जगह बड़े गड्ढे, उखड़ा सीमेंट और बाहर निकली गिट्टी निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के कार्यालय के ठीक पीछे सड़क की हालत सबसे ज्यादा खराब है। जिस रास्ते से प्रतिदिन वरिष्ठ अधिकारी, डॉक्टर और प्रशासनिक अमला गुजरता है, उसी मार्ग पर सड़क जर्जर हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
भारी वाहनों की आवाजाही नहीं, फिर भी सड़क बर्बाद
यह सड़क अस्पताल परिसर के भीतर स्थित है, जहां भारी वाहनों का नियमित आवागमन नहीं होता। इसके बावजूद सड़क का इतनी जल्दी उखड़ जाना निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
गारंटी बोर्ड भी गायब
सरकारी नियमों के अनुसार निर्माण स्थल पर कार्य की लागत, निर्माण एजेंसी, पूर्णता तिथि और गारंटी अवधि का बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है। लेकिन मौके पर ऐसा कोई बोर्ड नहीं मिला। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या गारंटी अवधि और जिम्मेदारी छिपाने के लिए सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया?
अधिकारियों की निगरानी पर सवाल
सड़क की ऊपरी परत टूट चुकी है, सीमेंट बिखर रहा है और गिट्टी बाहर आ चुकी है। यदि यह स्थिति निर्माण के थोड़े समय बाद ही बन गई है, तो गुणवत्ता परीक्षण, तकनीकी निरीक्षण और कार्य की निगरानी पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
10.55 करोड़ का काम, करोड़ों की जिम्मेदारी
दस्तावेजों के अनुसार:
कुल परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति: 17.61 करोड़ रुपए
आरसीसी सड़क निर्माण के लिए स्वीकृति: 10.55 करोड़ रुपए
कार्य लोक निर्माण विभाग (भवन/पथ) संभाग-1 के माध्यम से कराया गया।
ठेका मैसर्स हेमेंद्रसिंह पंवार को दिया गया।
निविदा स्वीकृत अनुमानित लागत से 15.50 प्रतिशत कम दर पर स्वीकृत हुई थी।
उठते सवाल
सड़क इतनी जल्दी क्यों उखड़ गई?
क्या निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप थी?
गुणवत्ता परीक्षण किस स्तर पर हुआ?
गारंटी बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया?
यदि सड़क गारंटी अवधि में है, तो मरम्मत और जवाबदेही कौन तय करेगा?
बौद्धिक प्रतिकार का सवाल
क्या 10.55 करोड़ रुपए की सड़क का यही हश्र होना था?
यदि प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल परिसर में निर्माण कार्य की यह स्थिति है, तो अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जिम्मेदार विभाग को पूरे मामले की तकनीकी जांच कराकर दोषियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

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