प्रणव बजाज
खरगोन की 40 साल पुरानी सहकारी मिल पर एनसीडीसी का ₹24.16 करोड़ बकाया, 23 सितंबर को ई-नीलामी; ₹8.08 करोड़ रखा गया आरक्षित मूल्य
खरगोन। कभी मुनाफे में चलने वाली खरगोन की जवाहर कॉटन मिल अब कर्ज के बोझ तले नीलामी की दहलीज पर पहुंच गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव से जुड़ी जवाहरलाल नेहरू सहकारी एग्रीकल्चर प्रोड्यूस प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड की संपत्ति की 23 सितंबर 2026 को ई-नीलामी प्रस्तावित है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम ने संपत्ति का आरक्षित मूल्य करीब 8.08 करोड़ रुपए तय किया है।
मिल पर एनसीडीसी का ब्याज सहित बकाया 24 करोड़ 16 लाख 39 हजार 17 रुपए तक पहुंच चुका है। छह मई 2025 को एनसीडीसी ने 20 करोड़ 97 लाख 91 हजार 380 रुपए की मांग जारी की थी। इसके बाद 25 अगस्त 2025 को मिल की संपत्ति पर कब्जे की कार्रवाई की गई। 16 जुलाई 2026 तक बकाया राशि बढ़कर 24.16 करोड़ रुपए हो गई।
नीलामी में जमीन, भवन और मशीनरी शामिल हैं। संपत्ति को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले हिस्से का आरक्षित मूल्य करीब 4.25 करोड़ और दूसरे का करीब 3.83 करोड़ रुपए बताया गया है। जमीन के रकबे को लेकर उपलब्ध विवरणों में भी अंतर है—कहीं करीब 19.78 एकड़ तो कहीं 19.25 एकड़ का उल्लेख मिलता है।
सबसे बड़ा सवाल मिल के वित्तीय सफर को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसी मिल ने 25 करोड़ 56 लाख रुपए का लाभ दर्ज किया था। इसके बाद सोसायटी में चुनाव हुए और अरुण यादव चेयरमैन बने। बाद के दौर में मिल की आर्थिक स्थिति बिगड़ती गई और दिसंबर 2023 से इकाई बंद बताई जा रही है।
सोसायटी से जुड़ी शुगर मिल भी बंद है। इस सहकारी संस्था का पुराना संबंध यादव परिवार से रहा है और इसके पहले अध्यक्ष सुभाष यादव थे।
अब सवाल सिर्फ नीलामी का नहीं, बल्कि यह भी है कि लाभ में चल रही इकाई इतनी तेजी से कर्ज और बंदी की स्थिति तक कैसे पहुंची? एनसीडीसी के अलावा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और नाबार्ड की देनदारियों का भी उल्लेख सामने आया है।
अरुण यादव का पक्ष जानने के लिए संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। सोसायटी के प्रबंध निदेशक दीपक कही ने बताया कि एनसीडीसी ने अपनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसकी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।
23 सितंबर की ई-नीलामी अब सिर्फ एक संपत्ति की बिक्री नहीं होगी। यह उस सहकारी मिल के पूरे वित्तीय सफर पर भी सवाल खड़े करेगी, जिसने एक समय करोड़ों का लाभ कमाया था और आज करोड़ों के बकाये के कारण अपनी जमीन, भवन और मशीनरी गंवाने की स्थिति में पहुंच गई है।

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