झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्तियां रद्द होने के बाद संकट में आ गई थीं। करीब 450 अभ्यर्थियों को इसका सीधा लाभ मिलने की बात सामने आई है।
लेकिन दूसरी तरफ आंदोलन कर रहे छात्र इसे अपने साथ धोखे के रूप में देख रहे हैं। जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच ने आरोप लगाया है कि सरकार के आश्वासन पर आंदोलन स्थगित किया गया था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। मंच ने शुक्रवार को झारखंड के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने का ऐलान किया है।
दरअसल, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों ने लंबे समय तक आंदोलन किया था। इसके बाद सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द करने और 17 अन्य भर्ती प्रक्रियाओं की जांच कराने का फैसला लिया था। सरकार के इस कदम से एक तरफ आंदोलन कर रहे छात्रों को राहत मिली, तो दूसरी ओर पहले से चयनित अभ्यर्थियों में नौकरी जाने का डर पैदा हो गया।
अब हाईकोर्ट की रोक ने विवाद को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ चयनित अभ्यर्थी राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं आंदोलनकारी छात्र भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग पर फिर सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
झारखंड में सवाल अब सिर्फ परीक्षाएं रद्द करने या बचाने का नहीं है। असली सवाल यह है कि नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं का भविष्य किस व्यवस्था के भरोसे छोड़ा जाएगा और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता कैसे कायम होगी?

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