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महाकाल लोक के बाद उज्जैन में ‘बुद्ध लोक’ की तैयारी, 2200 साल पुराने स्तूप से खुलेगा इतिहास का नया अध्याय

 


उज्जैन। महाकाल लोक के बाद उज्जैन की पहचान अब बौद्ध विरासत से भी जुड़ने की तैयारी में है। मध्य प्रदेश सरकार वैश्य टेकरी स्थित करीब 2200 वर्ष पुराने विशाल बौद्ध स्तूप को विकसित कर यहां ‘बुद्ध लोक’ जैसा बड़ा बौद्ध पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से नए सिरे से वैज्ञानिक उत्खनन की अनुमति मांगी गई है।



वैश्य टेकरी उज्जैन के कानीपुरा क्षेत्र में स्थित है। वर्ष 1938-39 में यहां सीमित खुदाई की गई थी, जिसमें विशाल बौद्ध स्तूप के प्रमाण मिले थे। उस समय खुदाई के दौरान जहरीली गैस के रिसाव से मजदूरों के बेहोश होने के बाद काम रोक दिया गया था। करीब नौ दशक बाद अब इस स्थल के रहस्य को वैज्ञानिक तरीके से सामने लाने की तैयारी है।


पुरानी पुरातात्विक रिपोर्टों में स्तूप का अनुमानित व्यास करीब 350 फीट और ऊंचाई कम से कम 100 फीट बताई गई है। इसकी तुलना सांची के महान स्तूप से की जाए तो वैश्य टेकरी का अनुमानित आकार कहीं अधिक बड़ा दिखाई देता है। हालांकि इसका वास्तविक स्वरूप और कालखंड आधुनिक उत्खनन के बाद ही प्रमाणित हो सकेगा।


सरकार की योजना केवल पुरातात्विक स्थल को संरक्षित करने तक सीमित नहीं मानी जा रही। उत्खनन से सामने आने वाली संरचनाओं, पुरावशेषों और बौद्ध इतिहास को पर्यटन से जोड़कर उज्जैन में एक नया सांस्कृतिक केंद्र विकसित करने की संभावना है। यदि परियोजना आकार लेती है तो महाकाल लोक के साथ बुद्ध लोक उज्जैन के पर्यटन मानचित्र को नया विस्तार दे सकता है।


सबसे बड़ा सवाल अब यही है—क्या वैश्य टेकरी का 2200 साल पुराना रहस्य उज्जैन को बौद्ध दुनिया के नक्शे पर नई पहचान दिलाएगा?

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