इंदौर। मानसून का आधे से ज्यादा सफर बीत चुका है, लेकिन इंदौर के आसमान ने अब तक शहर को वह बारिश नहीं दी, जिसका इंतजार था। अगस्त का आधा महीना गुजरने के बाद भी शहर में बारिश की कमी चिंता बढ़ा रही है। मौजूदा स्थिति में इंदौर को मानसून का औसत पूरा करने के लिए करीब 20 इंच अतिरिक्त बारिश की जरूरत बताई जा रही है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि मानसून के पास अब समय सीमित है। सामान्य मानसूनी अवधि में करीब 45 दिन शेष बताए जा रहे हैं। यानी जितने पानी की कमी है, उसे अगस्त के बचे दिनों और सितंबर में होने वाली बारिश से पूरा करना होगा। लगातार कमजोर बारिश का असर जलस्रोतों, भूजल और खेती पर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
हालांकि मौसम विशेषज्ञों की नजर बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो रहे नए मौसमी तंत्र पर है। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। इंदौर में भी इस प्रणाली से अच्छी बारिश की आस जगी है।
मध्य अगस्त में शहर की स्थिति सामान्य मानसून से काफी पीछे है। हाल के दिनों में कुछ बारिश जरूर हुई, लेकिन तेज और व्यापक बारिश का अभाव बना हुआ है। 13 अगस्त को इंदौर में 19.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी, जबकि इसके बाद भी भारी बारिश का इंतजार कायम है।
अब सवाल सिर्फ बारिश होने का नहीं, बल्कि कमी पूरी करने लायक बारिश कब और कितनी होगी, इसका है। अगस्त और सितंबर के अगले कुछ सप्ताह इंदौर के जल भविष्य के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।

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