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शेयर बाजार या सोना—20 साल में किसने दिया ज्यादा रिटर्न? समझिए पूरा गणित

 

पिछले एक साल में सोने की चमक ने निवेशकों का ध्यान फिर अपनी ओर खींचा है। वैश्विक आंकड़ों में सोने ने करीब 35 प्रतिशत का एक साल का रिटर्न दिया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अब शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में लगा देना चाहिए? इसका जवाब केवल पिछले एक साल के प्रदर्शन से नहीं, बल्कि लंबी अवधि के आंकड़ों से समझना चाहिए।



20 साल के आंकड़ों में सोने का वार्षिकीकृत रिटर्न करीब 10.7 प्रतिशत रहा है। भारत में लंबी अवधि के आंकड़ों पर नजर डालें तो अलग-अलग अवधि और गणना पद्धति के अनुसार सोने का रिटर्न लगभग 11-14 प्रतिशत और निफ्टी 50 का कुल रिटर्न करीब 12.44 प्रतिशत वार्षिक बताया गया है।


अब इसे ₹1 लाख के उदाहरण से समझें। अगर किसी निवेश को 20 साल तक औसतन 12 प्रतिशत सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न मिलता है, तो ₹1 लाख करीब ₹9.65 लाख हो सकता है। वहीं 10.7 प्रतिशत की दर से यही रकम करीब ₹7.8 लाख होती है। यानी लंबे समय में कुछ प्रतिशत का अंतर भी अंतिम रकम में बड़ा फर्क पैदा करता है।


लेकिन केवल रिटर्न देखकर फैसला करना सही नहीं है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है, जबकि सोना संकट और अनिश्चितता के समय पोर्टफोलियो को संतुलित करने में मदद कर सकता है। हाल के महीनों में सोने में भी तेज गिरावट देखने को मिली है, इसलिए इसे बिना जोखिम वाला निवेश समझना गलती होगी।


निवेश का बेहतर तरीका अक्सर एक ही जगह पूरी रकम लगाने के बजाय विविधीकरण होता है। आपकी उम्र, जोखिम उठाने की क्षमता, लक्ष्य और निवेश अवधि तय करेंगे कि शेयर और सोने में कितना पैसा होना चाहिए। पिछले एक साल का रिटर्न देखकर पूरा पैसा किसी एक संपत्ति में लगाना समझदारी नहीं है।

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