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2048 तक सर्वाइकल कैंसर खत्म करने का लक्ष्य कितना संभव? भारत के सामने बड़ी चुनौती


नई दिल्ली। सर्वाइकल कैंसर को उन कैंसरों में गिना जाता है, जिन्हें टीकाकरण, नियमित जांच और समय पर उपचार से बड़े पैमाने पर रोका जा सकता है। हालिया शोध के मुताबिक उच्च आय वाले देशों के 2048 तक सर्वाइकल कैंसर को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। लेकिन भारत जैसे निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लिए यह लक्ष्य अपने आप हासिल होना मुश्किल है। 



विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके लिए 90-70-90 रणनीति तय की है—15 वर्ष की उम्र तक 90 प्रतिशत लड़कियों को एचपीवी टीका, 35 और फिर 45 वर्ष की उम्र तक 70 प्रतिशत महिलाओं की उच्च गुणवत्ता वाली जांच और कैंसर-पूर्व अवस्था वाली 90 प्रतिशत महिलाओं का उपचार तथा कैंसर से पीड़ित 90 प्रतिशत महिलाओं का उचित प्रबंधन। देशों को 2030 तक इन लक्ष्यों की दिशा में पहुंचना है। 


भारत के लिए राहत की बड़ी खबर यह है कि 2026 में देश ने 14 वर्ष की लड़कियों को लक्षित करते हुए बड़े पैमाने पर निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने इसे भारत के सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन प्रयासों में महत्वपूर्ण कदम बताया है। 


फिर भी केवल टीका पर्याप्त नहीं है। महिलाओं की नियमित जांच, बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार उतने ही जरूरी हैं। भारत में अभी भी बड़ी आबादी तक जांच और टीकाकरण पहुंचाना चुनौती है।


इसलिए 2048 कोई भारत के लिए तय अंतिम तारीख नहीं है। भारत कितनी जल्दी इस बीमारी को खत्म करने के करीब पहुंचेगा, यह टीकाकरण की पहुंच, जांच व्यवस्था और उपचार की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। सही रणनीति और व्यापक कवरेज के साथ सर्वाइकल कैंसर को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म करना संभव है।

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