प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गोवंश परिवहन के एक मामले में जब्त किए गए वाहन की नीलामी को अवैध करार देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को वाहन स्वामी को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
न्यायालय ने कहा कि विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना वाहन की नीलामी नहीं की जा सकती। यदि प्रशासन कानून के अनुरूप कार्रवाई नहीं करता है, तो संबंधित व्यक्ति के संपत्ति संबंधी अधिकारों का उल्लंघन होता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी जब्त वाहन के संबंध में प्रशासन को वैधानिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य है। निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी कर की गई नीलामी न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।
इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वाहन स्वामी को 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक कार्रवाई हमेशा कानून के दायरे में और उचित प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए।
इस फैसले को जब्त संपत्तियों और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े मामलों में वैधानिक प्रक्रिया के पालन पर उच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी माना जा रहा है।

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