दिल्ली विधानसभा ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड से जुड़े संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसके साथ झुग्गी बस्तियों की पहचान के लिए तय कट-ऑफ तारीख को 1 जनवरी 2025 तक बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। सरकार का दावा है कि इससे लंबे समय से झुग्गियों में रह रहे हजारों परिवार पुनर्वास योजना के दायरे में आ सकेंगे।
संशोधन का मकसद झुग्गीवासियों के पुनर्वास की प्रक्रिया को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप बनाना और उन्हें पक्के आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना है। ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ की अवधारणा के तहत पात्र परिवारों को उसी क्षेत्र या उसके आसपास पुनर्वास देने पर जोर है।
19 साल पुरानी व्यवस्था में बदलाव क्यों?
दिल्ली में झुग्गी पुनर्वास से जुड़े नियम लंबे समय से पुराने कट-ऑफ और पात्रता मानकों के आधार पर चल रहे थे। इस दौरान शहर की आबादी, झुग्गी बस्तियों और आवास की जरूरत में बड़ा बदलाव आया। नई कट-ऑफ तारीख का उद्देश्य इस बदली हुई वास्तविकता को योजना में शामिल करना है।
हालांकि केवल कट-ऑफ तारीख बदलने से समस्या खत्म नहीं होगी। असली परीक्षा पात्र परिवारों की सही पहचान, पारदर्शी आवंटन और समय पर मकान निर्माण की होगी।
दिल्ली में झुग्गी पुनर्वास हमेशा से राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रहा है। इसलिए सरकार के सामने चुनौती यह भी होगी कि विकास और पुनर्वास के नाम पर गरीब परिवारों का विस्थापन न हो और जिन लोगों को योजना का लाभ मिलना है, वे वास्तव में उससे वंचित न रह जाएं।
कानून पास होना पहला कदम है। अब निगाह इस बात पर होगी कि ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ का वादा जमीन पर कितने परिवारों के लिए घर बनता है।

Post a Comment