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सिद्धिविनायक की दानपेटी पर 18 करोड़ का साया! ट्रस्टियों के पत्र से मचा हड़कंप, उच्चस्तरीय जांच की मांग

परीक्षित गुप्ता : मुंबई



मुंबई। देश के सबसे प्रतिष्ठित गणेश मंदिरों में शामिल सिद्धिविनायक मंदिर एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गया है। मंदिर के कई ट्रस्टियों द्वारा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में दानपेटी से होने वाली कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है। इसी पत्र के आधार पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि मंदिर की दानराशि में प्रतिवर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये की संभावित हेराफेरी होती रही है। 


ट्रस्टियों के पत्र के अनुसार, दानपेटी से नकदी की गिनती में कथित गड़बड़ियों के संदेह के बाद कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। इसके बाद मंदिर में साप्ताहिक दान संग्रह लगभग 50 लाख रुपये से बढ़कर 90 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी अंतर के आधार पर पुराने वर्षों के लेखे-जोखे की उच्चस्तरीय जांच और विशेष ऑडिट की मांग उठाई गई है। 


मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने हालांकि स्पष्ट किया कि 18 करोड़ रुपये की चोरी सिद्ध नहीं हुई है। उनका कहना है कि पत्र में केवल अनियमितताओं की जांच और ऑडिट की मांग की गई थी। उन्होंने बताया कि संदिग्ध गतिविधियों के मामले में कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है और प्रबंधन में सुधार के बाद मंदिर की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 


अब यह मामला केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास और धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता का भी बन गया है। यदि उच्चस्तरीय जांच होती है, तो यह स्पष्ट होगा कि दानराशि में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई थी या आय बढ़ने के पीछे केवल बेहतर प्रबंधन जिम्मेदार था।

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