मुजफ्फरनगर। आस्था के आगे शारीरिक सीमाएं भी छोटी पड़ जाती हैं। इसका जीवंत उदाहरण मुजफ्फरनगर के दृष्टिहीन शिवभक्त सत्येंद्र हैं, जिन्होंने इस वर्ष लगातार 17वीं बार कांवड़ यात्रा पूरी कर अटूट श्रद्धा का परिचय दिया।
सत्येंद्र को दिखाई नहीं देता, लेकिन उनके कदम कभी नहीं डगमगाए। हाथ में सिर्फ एक लाठी और मन में भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास लेकर उन्होंने हरिद्वार से मुजफ्फरनगर तक का सफर करीब तीन दिनों में पूरा किया।
यात्रा के दौरान रास्ते की कठिनाइयों, भीड़ और लंबी दूरी ने उनके संकल्प को कमजोर नहीं किया। रास्ते में मिलने वाले कांवड़ियों और स्थानीय लोगों ने भी समय-समय पर उनका सहयोग किया, लेकिन पूरी यात्रा का आधार उनका आत्मविश्वास और भोलेनाथ में अटूट विश्वास रहा।
सत्येंद्र का कहना है कि भगवान शिव की कृपा और आस्था ही उन्हें हर वर्ष यह कठिन यात्रा पूरी करने की शक्ति देती है। उनके लिए कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा संकल्प और श्रद्धा का पर्व है।
दृष्टिहीन होकर भी लगातार 17 वर्षों से कांवड़ यात्रा पूरी करने वाले सत्येंद्र आज हजारों शिवभक्तों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उनकी कहानी बताती है कि जब विश्वास मजबूत हो, तो मंजिल तक पहुंचने से बड़ी कोई बाधा नहीं होती।

Post a Comment