आयाम बजाज
मुंबई। महाराष्ट्र की महायुति सरकार में लंबे समय से अटके महामंडलों और निगमों के बंटवारे को लेकर अब तस्वीर साफ होती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पर सोमवार शाम हुई करीब डेढ़ घंटे की महायुति समन्वय समिति की बैठक में सत्ता-साझेदारी से जुड़े लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार सहित गठबंधन के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
सबसे अहम मुद्दा राज्य के विभिन्न महामंडलों और निगमों में नियुक्तियों का रहा। सूत्रों के मुताबिक, इनके बंटवारे पर अगले 15 दिनों के भीतर अंतिम मुहर लग सकती है। इसके लिए महायुति के तीनों घटक दलों की विधानसभा में संख्या को प्रमुख आधार बनाने की तैयारी है। यानी जिस दल के पास जितने विधायक हैं, सत्ता से जुड़ी इन संस्थाओं में उसकी हिस्सेदारी उसी अनुपात में तय किए जाने की संभावना है।
बैठक का दूसरा बड़ा फैसला जिला नियोजन समिति यानी डीपीसी के विकास फंड को लेकर सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, कुल निधि में से 70 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय विधायकों के माध्यम से विकास कार्यों के लिए और शेष 30 प्रतिशत निधि के इस्तेमाल का निर्णय पालकमंत्री करेंगे। यह व्यवस्था गठबंधन के भीतर लंबे समय से चले आ रहे निधि-वितरण के विवाद को कम करने की कोशिश मानी जा रही है।
स्थानीय स्तर पर निधि को लेकर भाजपा, शिवसेना और राकांपा के नेताओं के बीच मतभेद होने पर पहले आयुक्त स्तर पर समाधान निकाला जाएगा। इसके बावजूद विवाद कायम रहा तो मामला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के स्तर तक जाएगा।
बैठक में गठबंधन के नेताओं को एक-दूसरे के दल, विधायक, सांसद और वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी से बचने का संदेश भी दिया गया। अब असली परीक्षा महामंडलों के बंटवारे की है। क्या 15 दिन में फॉर्मूला जमीन पर उतरता है, या फिर सत्ता के हिस्से को लेकर महायुति में एक बार फिर खींचतान शुरू होती है?

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