Top News

धरती के बाद समंदर भी तप रहा! अगस्त में महासागरों की गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड, भारत के मानसून पर बढ़ा खतरा

 

नई दिल्ली। जलवायु संकट का असर अब केवल धरती के तापमान तक सीमित नहीं रह गया है। अगस्त 2026 में दुनिया के महासागरों का औसत सतही तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। कोपरनिकस के आंकड़ों के अनुसार समुद्र की औसत सतही गर्मी करीब 21.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंची, जो पिछले रिकॉर्ड से भी ऊपर है। वैज्ञानिकों के लिए चिंता की बात यह है कि समुद्र का तापमान आमतौर पर मार्च-अप्रैल में चरम पर पहुंचता है, लेकिन इस बार अगस्त में ही नया रिकॉर्ड बन गया।



इस असाधारण गर्मी के पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं—लंबे समय से बढ़ रही मानवजनित जलवायु गर्मी और तेजी से मजबूत हो रहा अल नीनो। कार्बन उत्सर्जन से पैदा अतिरिक्त गर्मी का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा महासागर सोखते हैं। अब समुद्र के लगातार गर्म होने से समुद्री जीव-जंतुओं, प्रवाल भित्तियों और मत्स्य संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।


भारत के लिए भी संकेत चिंताजनक हैं। 24 अगस्त तक देश में मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम रही है। रॉयटर्स के मुताबिक 2026 का मानसून 2009 के बाद सबसे कमजोर मानसून बन सकता है और मौसमी बारिश सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम रहने का अनुमान है। मजबूत होता अल नीनो इस कमी का प्रमुख कारण माना जा रहा है।


हालांकि भारत सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि मानसून केवल अल नीनो से तय नहीं होता। हिंद महासागर द्विध्रुव, मैडेन-जूलियन दोलन और क्षेत्रीय समुद्र-वायुमंडल परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


सवाल अब सिर्फ गर्म होती धरती का नहीं है—जब समुद्र भी उबलने लगे हैं, तो खेती, मछलीपालन, पानी और आने वाले मानसून का भविष्य कितना सुरक्षित है?

Post a Comment

Previous Post Next Post