विशेष रिपोर्ट | बौद्धिक प्रतिकार
बेंगलुरु/नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सियासत तेज हो गई है। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब कथित तौर पर "उनके ही लोग" इस मामले में शामिल बताए जा रहे हैं, तो सजा की मांग करने का नैतिक अधिकार RSS को कैसे मिल सकता है।
प्रियांक खरगे ने कहा कि यदि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में चढ़ावे के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले पर RSS की प्रतिक्रिया काफी देर से आई, जिससे कई तरह के सवाल खड़े होते हैं।
दरअसल, RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसाबले ने हाल ही में कहा था कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और किसी को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस ने RSS पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
वहीं कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने भी विवाद को नया राजनीतिक मोड़ देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि "कांग्रेस स्वयंसेवक संघ" जैसे संगठन को मजबूत किया जाए, ताकि वैचारिक स्तर पर RSS का मुकाबला किया जा सके।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि बिना जांच पूरी हुए इस तरह के बयान केवल धार्मिक आस्था और संवेदनशील मुद्दों पर भ्रम फैलाने का प्रयास हैं। पार्टी का कहना है कि यदि कहीं कोई अनियमितता हुई है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब केवल कथित वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का नया मुद्दा बन गया है। एक ओर कांग्रेस RSS और भाजपा को घेरने में जुटी है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है।

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