नई दिल्ली। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) और उसके सहयोगी गैर-ओपेक तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ने वैश्विक मांग और बाजार की स्थिति को देखते हुए तेल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। संगठन का मानना है कि विश्व अर्थव्यवस्था में सुधार और ऊर्जा की बढ़ती मांग के बीच अतिरिक्त उत्पादन से बाजार में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
OPEC+ की बैठक में सदस्य देशों ने मौजूदा उत्पादन नीति की समीक्षा की और आने वाले महीनों में चरणबद्ध तरीके से उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया। संगठन ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के बावजूद बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर उत्पादन नीति में बदलाव भी किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। यदि उत्पादन तय योजना के अनुसार बढ़ता है तो वैश्विक बाजार में आपूर्ति मजबूत होगी, जिससे कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है। इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है, जहां कच्चे तेल की कीमतों का सीधा प्रभाव पेट्रोल और डीजल की लागत पर पड़ता है।
हालांकि, OPEC+ ने स्पष्ट किया है कि भविष्य के सभी निर्णय वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, तेल की मांग और भू-राजनीतिक घटनाक्रम को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे। संगठन का उद्देश्य ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखना और उत्पादक तथा उपभोक्ता देशों के हितों के बीच संतुलन कायम रखना है।

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