नई दिल्ली। देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी के निदेशक मंडल ने कर्नाटक के मंगलूरु में 1.75 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) क्षमता वाले नए सामरिक पेट्रोलियम भंडार के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की मानी जा रही है और भविष्य में वैश्विक संकट या कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने जैसी परिस्थितियों में देश के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी
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सरकार के निर्देश पर विकसित किए जा रहे इस भूमिगत भंडार में कच्चा तेल सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक कीमतें बढ़ने या आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में देश की जरूरतों को पूरा किया जा सके। यह पहली बार होगा जब ओएनजीसी स्वयं इस तरह के सामरिक पेट्रोलियम भंडार के विकास और वित्तपोषण की जिम्मेदारी संभालेगी।
इस नई परियोजना के जुड़ने से भारत की मौजूदा सामरिक कच्चा तेल भंडारण क्षमता में लगभग एक-तिहाई की वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता को देखते हुए यह फैसला देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम साबित होगा।
जानकारों के अनुसार, इस परियोजना पर हजारों करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है। इसके पूरा होने के बाद भारत आपातकालीन परिस्थितियों में अपने रणनीतिक तेल भंडार के दम पर ऊर्जा आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करेगा।

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