जून 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर है। महंगाई में इस बढ़ोतरी के बाद अब आम लोगों की नजर आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति पर टिक गई है कि क्या ब्याज दरों में बदलाव होगा और इसका असर घर, वाहन तथा अन्य कर्जों की मासिक किस्त (ईएमआई) पर पड़ेगा।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई में हालिया बढ़ोतरी का प्रमुख कारण खाद्य वस्तुओं और आपूर्ति संबंधी दबाव हैं, जबकि अर्थव्यवस्था में मांग आधारित महंगाई अभी भी सीमित दिखाई दे रही है। ऐसे में आरबीआई फिलहाल इसे अस्थायी दबाव मानते हुए नीतिगत ब्याज दरों में तत्काल बदलाव से बच सकता है।
यदि आरबीआई रेपो दर को यथावत रखता है, तो अधिकांश मौजूदा कर्जधारकों की ईएमआई में तत्काल कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि भविष्य में महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती है या अन्य आर्थिक परिस्थितियां बदलती हैं, तो केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में महंगाई, मानसून, खाद्य कीमतों, वैश्विक कच्चे तेल के दाम और आर्थिक वृद्धि के आंकड़े आरबीआई के अगले फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल बाजार की धारणा यही है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए आर्थिक परिस्थितियों पर करीबी नजर बनाए रख सकता है।

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