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चलचित्र- कला और अनुभव का संगम

 


लेखक : आयाम बजाज (मुंबई)


मूवी, फिल्म, चलचित्र- यानि कला का एक ऐसा माध्यम, जिसे देखकर लोगों का मनोरंजन हो सके। जहां हम एक श्रोता और एक दर्शक के रूप में एक कहानी को देखते हैं। पर क्या सारी फिल्में सिर्फ आनंद लेने के लिए ही होती हैं ? अगर ऐसा होता तो लोग फिल्में देख कर रोते नहीं। फिर तो फिल्में प्रतिबंधित भी नहीं होती। फिर लोग कभी भी अपनी जीवनशैली को फिल्में देख कर प्रभावित नहीं करते। तो ऐसा क्या है कला के इस संगम में कि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का एक आवश्यक पहलू है भी, और था भी, अपने आगमन से?



एक फिल्म का सबसे मूल हिस्सा है कहानी। एक किस्सा, एक सच्ची घटना, या फिर कोई कविता। किसी भी फिल्म में सबसे महत्वपूर्ण उसकी कहानी ही होती है क्योंकि यह मानव कि कल्पना का सबसे वास्तविक प्रतीक है । इंसान के हर तरह के विचार, मूल्य, और भावनाएँ किसी न किसी कहानी में सँजोय हुए हैं। हमारे व्यक्तिगत अनुभव, हमारा दुख, हमारे कष्ट, हमारी पसंद-नापसंद, हम इन कहानियों में अवचेतन रूप से ढूंढ ही लेते हैं। कुछ फिल्में जैसे कि जापानी फिल्म, “Seven Samurai”, “अर्ध सत्य”, “Godfather 1&2”, “Taxi Driver”, अपनी अद्भुत कहानियों से दर्शकों के हृदय में अपनी छाप छोड़ जाती हैं। किन्तु यह कहानी हम महसूस कर सके, इसके लिए जरूरी है अच्छा निर्देशन। 


निर्देशन किसी भी फिल्म को उसके दर्शक के दिल तक पहुचाने कि क्षमता रखता है। निर्देशक का कर्तव्य सबसे कठिन होता है। अलग अलग तत्वों को संभाल कर एक कहानी को सबसे श्रेष्ठ रूप में लेके आना उनका काम है। हर निर्देशक की अपनी एक शैली होती है, उदाहरण के तौर पर “सत्यजित रे”, “Christopher Nolan”, “Quentin Tarantino”, “Stanley Kubrick”, जैसे दिग्गज निर्देशक हर फिल्म को एक अलग अंदाज में दिखाते हैं जो की उनकी कला का सबूत साबित होता है। इसमे अलग अलग श्रेणियाँ होती हैं, और हर श्रेणी अपने आप मैं प्रभावी होते है। सबसे पहला तत्व है पटकथा या स्क्रीन्प्ले, जो कि कहानी को विस्तृत और उचित तरीके से एक आकार देता है, जिसमे एक लय होती है। इसकी संरचना इस प्रकार होती है कि कहानी को एक एक द्रश्य या सीन मे लिखा जाता है जहा हर एक पहलू को परिभाषित किया जाता है - पात्रों का आगमन और गमन, संगीत का सटीक उपयोग, द्रश्य कि अवधि, इत्यादि निर्धारित किया जाता है। फिल्में जैसे “Pulp Fiction”, “12 Angry Men”, “Good Will Hunting”, उत्तम स्क्रीनप्ले दर्शाती हैं। 


छायांकन या सीनेमॅटोग्राफी एक और श्रेणी है जो कि निर्देशन कि दृष्टि को सही ढंग से प्रस्तुत करता है। इसमे कैमरा ऐंगल, रोशनी, फरमिंग, काम्पज़िशन, कलर ग्रेडिंग जैसे तत्व शामिल होते है जो कि किसी भी फिल्म कि कहानी को बेहतर तरीके से देख पाने मे सहायता करते हैं। “Mad Max Fury Road”, “Interstellar”, “Dune 1&2”, “The Grand Budapest Hotel” जैसी फिल्मों में छायांकन कि अहम भूमिका है। चयन करना या कास्टिंग भी एक ऐसी श्रेणी है जो यह बताती है कि एक अभिनेता किसी पात्र मे कितना ज्यादा सटीक दिख सकता है, मानो दर्शकों के लिए वह फिल्म का पात्र ही हो न कि अभिनेता। फिल्म “धुरंधर 1&2”, “भाग मिलखा भाग”, “संजु”, “Marty Supreme”, “Inglorious Basterds”, ये सभी बेहतरीन कास्टिंग कि मिसाल हैं। 


फिल्मों का संगीत भी एक आवश्यक पहलू है, क्योंकि संगीत से किसी भी द्रश्य में दिखाने वाली भावनाओं कि गहराई और फिल्म कि लय और आकार बनता है। मशहूर संगीतकार जैसे “Hans Zimmer”, “John Williams” , “आर. डी. बर्मन” , आदि कहानी के अनुसार ऐसे संगीत की रचना करते है जिससे कि हम फिल्म में दिखाई गई दुनिया में चले जाते हैं। अभिनय करना भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो कि किसी भी द्रश्य में महसूस होने वाली उसके पीछे कि सोच को मोखिक और प्रकरतिक रूप से लेके आता है। कुछ कलाकार किरदार का इतने सटीक प्रकार से अभिनय करते है कि दर्शक फिल्म खतम होने के बाद भी उससे बाहर नहीं आ पाते हैं। “Al Pacino”, “Robert De Niro”, “Daniel Day-Lewis”, “दिलीप कुमार”, “कमाल हासन”, कुछ ऐसे दिग्गज अभिनेता हैं, जिनके प्रदर्शन को देख कर लोग उनके दीवाने हो जाते हैं।  


यह सारी श्रेणियाँ और एक फिल्म के विभिन्न तत्वों के संगम से जो परदे पर आता है वह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक अनुभव होता है। और उन 2-3 घंटों में हम एक दूसरी दुनिया में चले जाते है, जहा हम देखते है एक कहानी, और महसूस करते है ऐसे जज़्बात, जो हम या तो अपने जीवन मे महसूस कर चुके हैं, या जो हम करना चाहते हैं, या फिर जो हम नहीं करना चाहते हों पर फिर भी महसूस करते हैं। प्यार, रोमांच, गुस्सा, डर, जीवन-दर्शन, खुशी, अट्टहास, भावुकता, इत्यादि और भी भावनाओं की लहरें हमारे अंतर्मन में धधकती हैं। इसलिए एक फिल्म, केवल एक चलचित्र नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है, जिससे मानव कि सोच विकसित होती है, जिससे उसका मत बदलता है, या जिससे उसकी मनोदशा बदलती है। ऐसे में निर्माताओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि कला का सबसे सुंदर रूप, उसकी मोलिकता और विशिष्टता में होता है।

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