डायबिटीज के मरीजों के बीच यह धारणा काफी प्रचलित है कि रोज जामुन खाने से रक्त शर्करा पूरी तरह नियंत्रित हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें कुछ सच्चाई जरूर है, लेकिन इसे मधुमेह का इलाज या दवा का विकल्प मानना सही नहीं है।
जामुन में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में शर्करा के अवशोषण की गति को कुछ हद तक धीमा करने में मदद कर सकते हैं। इसका ग्लाइसेमिक सूचकांक भी अपेक्षाकृत कम होता है, इसलिए सीमित मात्रा में इसका सेवन मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी माना जाता है।
हालांकि, केवल जामुन खाने से शुगर नियंत्रित नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, समय पर दवाएं और रक्त शर्करा की नियमित जांच सबसे अधिक जरूरी है। जामुन इन उपायों का पूरक हो सकता है, लेकिन उनका विकल्प नहीं।
डायबिटीज के मरीजों को जामुन का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए और यदि वे इंसुलिन या शुगर कम करने वाली दवाएं ले रहे हैं तो बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी घरेलू उपाय पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए।
विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि रक्त शर्करा लगातार बढ़ी हुई रहती है या उसमें बार-बार उतार-चढ़ाव होता है, तो स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेकर ही खानपान और दवाओं में बदलाव करें।

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