...
दीप भाड़
भारत जहाँ हमारी संस्कृति हमे यही सिखाती है कि नारी का सदैव सम्मान होना चाहिए...बहुत ही सुंदर बात कही गई है किंतु जिसने भी यह लिखा होगा जिस समय ,जिस भाव से लिखा होगा निश्चित ही लिखने वाले के आसपास जो नारिया होंगी वो पूजनीय होंगी...
अभी तक तक तो एक आम सभ्य भारतीय भी यही मान कर चल रहा था किंतु पिछले दिनों जंतर मंतर पर हुए विद्यार्थी आंदोलन ने इस वाक्य पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है कि क्या नारी हमेशा पूजनीय है चाहे उसके आचरण कैसा भी हो...हमने आंदोलन में नारियों का जो वीभत्स रूप देखा है वो किसी दुस्वप्न से बुरा नहीं था क्या एक नारी के अंदर ये भाव भी हो सकते है...
विद्यार्थी आंदोलन निश्चित ही विद्यार्थियों के भविष्य को एक सुंदर भविष्य देगा इसकी प्रशंसा होनी चाहिए किंतु अभी तक जो व्यवहार पर्दे में था अब जब पर्दा हटा है तो होश उड़ गए है...
इस आंदोलन से सबकुछ बदल गया...GEN Z-18,20 वर्ष की लड़कियों का यह व्यवहार है कि वो 75 वर्षीय वृद्ध जो कि आपके देश का प्रधानमंत्री है उन्हें इतनी गन्दी गन्दी धाराप्रवाह गलिया दे रही है ना केवल उन्हें बल्कि उनके दिवंगत पिता उनकी दिवंगत माता को भी नीच गालिया दी गई। ऐसी गालिया जिसे कई लोगों ने सुना भी नहीं होगा।बड़ी निर्लज्जता के साथ कैमरे के सामने गालिया दी गई, कैमरे के सामने भद्दि बातों से भरे पोस्टर दिखाए गए...सांकेतिक रूप से प्रधानमंत्री जी की तेहरवी का खाना बाँटा गया... यदि GEN Z ऐसे होते है तो इस पर तो गर्व करने जैसी कोई बात लगती नहीं।
हम हमेशा से किसी महिला,लड़की को एक सभ्य, सुशील ,निर्मल, कोमल और आवश्यकता पढ़ने पर दृढ़ मानते आए है।
पुरुष जब आपस में बात करते है तो अपनी भाषा का ध्यान नहीं रखते किंतु जैसे ही उनके आसपास कोई लड़की या महिला होती है वो अपनी भाषा को सम्हालते है।गालिया या असभ्य बात करने से बचते है यदि कोई गलत बोल रहा है तो उसे यह कहकर टोक दिया जाता है कि...ओ भईया लेडीज बैठी है गाली गलौच मत करो...एक आम धारणा है कि महिलाओं के सामने इस तरह की बाते नहीं की जानी चाहिए क्योंकि हम उनका आदर करते है।
पुरुषों, लड़कों को तो भारतीय समाज में हमेशा से असभ्य,अल्हड़,अक्खड़ मानते हुए ज्यादा सम्मान नहीं दिया गया जो सामान्य सी बात है सम्मानतः पुरुष होते भी ऐसे ही है।
ऐसा नहीं कि आंदोलन में किसी लड़के, किसी पुरुष ने ऐसी नीच हरकत ना की हो,कई लड़के ऐसे भद्दे पोस्टर लेकर खड़े थे किंतु यह कोई आश्चर्य वाली बात नहीं क्योंकि लड़के/पुरुष तो पहले ही भारत के टुकड़ों का स्वप्न देख चुके है उन्हें देखकर आश्चर्य नहीं हुआ, गहरा घाव तो तब लगा जब हमारी मातृशक्तियों को ऐसा करते देखा।
GEN Z कहते हुए महिमामंडन करने की कोई आवश्यकता नहीं है हर 20 से 30 वर्षों में नई पीढ़ी आती है और अपने साथ कुछ पहले से बेहतर लाती है पर यहां तो पहले से और भी बुरा घिनौना आचरण लेकर GEN Z आए है।
मन को सवाल खाए जा रहे है ये कौन बच्चे है,इनके माता पिता कौन है,इन्हें क्या संस्कार दिए गए है, कहा से सीखी ये भद्दि गालिया और ये खुद ऐसे है तो अब ये इनके आने वाले बच्चों को क्या संस्कार देने वाले है। ये सब सवाल मन को विचलित कर देते है और दिमाग को चकरा देते है।
यह भारत जिसने मातोश्री अहिल्याबाई होल्कर जैसी न्यायप्रिय शासिका को भी देखा,जिसने महारानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगना को भी देखा...इस भारत ने कई नई पीढ़ियों देखी किंतु इसने ऐसी पीढ़ी नहीं देखी होगी जो अपनी सेना को गालिया दे,अपने सुरक्षा बलों को गलियाँ दे...
क्या ऐसे GEN Z के लिए भगत सिंह शहीद हुए थे,क्या इस दिन के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा ने शहादत को गले लगाया,विक्रम साराभाई,अब्दुल कलाम जी ने क्या इनके लिए अपना जीवन विज्ञान की खोज में झोंक दिया, क्या इनकी गालिया सुनने के लिए हमारे जवान -35 पर अपनी हड्डियां गला रहे है,क्या इनके लिए हम पेड़ लगा रहे है ,क्या इनके लिए दूर अंतरिक्ष में नया घर ढूंढ रहे है ताकि ये सुरक्षित रहे और फिर हमे गालिया दे।
GEN Z को समझना होगा कि केवल दूसरों को बुरा बोलना, उनका मजाक बना अपनी संस्कृति का अपने देवताओं का अपमान करने से कोई COOL नहीं हो जाताl
आज के माता पिता इस और ध्यान दे कि हमारा बच्चा शिक्षा के साथ साथ अच्छे संस्कार भी ग्रहण कर रहा है या नहीं..? वह अपने देश,अपनी सेना,अपनी संस्कृति के प्रति क्या सोच रखते है क्योंकि यदि आपका बच्चा अपनी सेना को गली दे सकता है अपने प्रधानमंत्री को गली दे सकता है तो वो आपको भी गाली बकने में संकोच नहीं करेगा।
कुछ महिलाओं का आचरण हो सकता है किन्हीं परिस्थितियों के कारण बिगड़ गया हो किंतु यह बात ध्यान रहे...
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
जहां स्त्रियों का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते है।


Post a Comment