इंदौर संभाग में फिर बदला 'सरदार': तीन साल में चौथा कमिश्नर, क्या अफसरों के साथ चल रहा है 'खो-खो' का खेल?

 

प्रणव बजाज


माल सिंह, दीपक सिंह और डॉ. सुदाम खाड़े समय से पहले हटे; अब भास्कर लक्षकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती—क्या उन्हें मिलेगा काम करने का समय?



इंदौर।

मध्य प्रदेश में नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के पदभार ग्रहण करने के महज 24 घंटे के भीतर जारी हुई आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची ने प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इंदौर संभाग को एक बार फिर नया आयुक्त मिला है। 2010 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भास्कर लक्षकार ने संभागायुक्त का पदभार संभाल लिया है, लेकिन सवाल वही है—क्या उन्हें अपने पूर्ववर्तियों की तरह समय से पहले ही विदा कर दिया जाएगा?


पिछले करीब तीन वर्षों में इंदौर संभाग को चौथा संभागायुक्त मिला है। इससे पहले माल सिंह, दीपक सिंह और डॉ. सुदाम खाड़े तीनों का कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा रहा। लगातार हो रहे इन बदलावों ने प्रशासनिक स्थिरता और दीर्घकालिक विकास योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



माल सिंह: योजनाओं की रफ्तार, लेकिन कार्यकाल छोटा


माल सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों, वनवासी अंचलों, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि से जुड़े विषयों पर सक्रियता दिखाई थी। हालांकि उनका कार्यकाल एक वर्ष भी पूरा नहीं हो पाया और उनका तबादला कर दिया गया। इससे यह संदेश गया कि अच्छे कामों के बावजूद अधिकारी लंबे समय तक टिक नहीं पा रहे हैं।


दीपक सिंह: जिम्मेदारी किसी और की, असर उन पर


माल सिंह के बाद दीपक सिंह ने जिम्मेदारी संभाली, लेकिन वे पूरी तरह कामकाज संभाल पाते उससे पहले ही उनका तबादला हो गया। प्रशासनिक हलकों में उस समय भी यह चर्चा रही कि परिस्थितियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।


डॉ. सुदाम खाड़े: इंदौर की नब्ज समझते ही बदली जिम्मेदारी


सितंबर में इंदौर आए डॉ. सुदाम खाड़े ने संभाग का व्यापक दौरा शुरू किया था और कई नई योजनाओं की रूपरेखा तैयार की थी। लेकिन दस महीने के भीतर ही उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर भोपाल बुला लिया गया। इससे एक बार फिर यह धारणा मजबूत हुई कि इंदौर संभाग में अधिकारी स्थायी रूप से काम नहीं कर पा रहे हैं।


अब भास्कर लक्षकार के सामने चुनौती


भास्कर लक्षकार इससे पहले खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में आयुक्त-सह-संचालक रहे हैं। वे मुरैना, गुना और रतलाम जैसे जिलों में कलेक्टर रह चुके हैं और मैदानी प्रशासन का अनुभव रखते हैं। पदभार ग्रहण करने से पहले उन्होंने खजराना गणेश और रणजीत हनुमान मंदिर में दर्शन किए तथा टीम वर्क के साथ काम करने की बात कही।


सात जिलों में भी बदले कलेक्टर


इसी तबादला सूची में प्रदेश के सात जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं। खरगोन में गुरु प्रसाद, रतलाम में अजय कटेसरिया, अनूपपुर में रत्नाकर झा, मंदसौर में दिव्यांक सिंह, आगर-मालवा में डॉ. शेरसिंह मीणा को नई जिम्मेदारी मिली है। वहीं मिशा सिंह को शहडोल का कलेक्टर बनाया गया है।


सबसे बड़ा सवाल


लगातार हो रहे तबादलों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या अधिकारी दीर्घकालिक विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए पर्याप्त समय पा रहे हैं? या फिर हर कुछ महीनों में बदलते चेहरे प्रशासनिक निरंतरता को प्रभावित कर रहे हैं? इंदौर संभाग में बार-बार हो रहे बदलावों ने यही बहस तेज कर दी है कि विकास के लिए स्थिर नेतृत्व अधिक आवश्यक है या लगातार प्रशासनिक फेरबदल।

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