नई दिल्ली। हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) को अक्सर "साइलेंट किलर" कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण कई बार दिखाई नहीं देते। लेकिन जब रक्तचाप बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो यह हाइपरटेंसिव क्राइसिस (Hypertensive Crisis) की स्थिति पैदा कर सकता है, जो एक गंभीर चिकित्सीय आपातकाल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 180/120 mmHg या उससे अधिक हो जाए, तो इसे हाइपरटेंसिव क्राइसिस माना जाता है। इस स्थिति में तुरंत दोबारा ब्लड प्रेशर मापना चाहिए और यदि स्तर लगातार ऊंचा रहे या कोई गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए अस्पताल पहुंचना चाहिए।
हाइपरटेंसिव क्राइसिस के दौरान तेज सिरदर्द, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, धुंधला दिखना, बोलने में परेशानी, भ्रम, कमजोरी या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर स्ट्रोक, हार्ट अटैक, किडनी फेल होने या आंखों की रोशनी प्रभावित होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर के मरज अपनी दवाएं नियमित रूप से लें, नमक का सेवन सीमित रखें, धूम्रपान और शराब से बचें, नियमित व्यायाम करें तथा समय-समय पर रक्तचाप की जांच कराते रहें। यदि ब्लड प्रेशर अचानक बहुत बढ़ जाए या गंभीर लक्षण महसूस हों, तो स्वयं दवा की अतिरिक्त खुराक लेने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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