प्रणवबजाज
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार की आपदा राहत व्यवस्था पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में राहत वितरण, नुकसान के आकलन, लाभार्थियों के चयन और सरकारी धन के उपयोग की प्रक्रिया में कई कमियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत कई दावों का केंद्रीय जांच टीम के आकलन से मेल नहीं मिला।
कैग की समीक्षा के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से 35,018 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। लेकिन केंद्र सरकार की जांच और मूल्यांकन के बाद केवल 2,707 करोड़ रुपये की सहायता की सिफारिश की गई। दोनों आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर नुकसान के आकलन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य सरकार ने लगभग 24 लाख मकानों के क्षतिग्रस्त होने का दावा करते हुए करीब 18,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। हालांकि, केंद्रीय मूल्यांकन टीम को बड़ी संख्या में पक्के मकानों को हुए नुकसान के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले, जिसके बाद नुकसान के अनुमान को कम कर दिया गया।
कैग की प्रमुख आपत्तियां
राहत सहायता के लिए एक समान और पारदर्शी आवेदन प्रणाली का अभाव।
लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता की कमी।
कई मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम दो बार दर्ज पाया गया।
राहत राशि जारी करने से पहले अभिलेखों का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया गया।
राहत सामग्री के भंडारण और वितरण की निगरानी कमजोर रही।
संदिग्ध और अनियमित भुगतानों की जांच आवश्यक बताई गई।
कैग की प्रमुख सिफारिशें
आपदा से हुए नुकसान का वैज्ञानिक और तथ्यात्मक आकलन किया जाए।
राहत आवेदन और स्वीकृति की एक समान प्रक्रिया लागू की जाए।
लाभार्थियों का चयन पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
भुगतान से पहले रिकॉर्ड का अनिवार्य सत्यापन हो।
राहत सामग्री के भंडारण और वितरण की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
अनियमित भुगतान के मामलों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
सरकारी दावों का होगा जमीनी सत्यापन
कैग ने स्पष्ट किया है कि केवल सरकारी कार्रवाई रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जाएगी। ऑडिट दल मौके पर जाकर यह सत्यापित करेगा कि रिपोर्ट में सुझाए गए सुधार वास्तव में लागू हुए हैं या नहीं। इसके बाद ही अंतिम अनुपालन की पुष्टि की जाएगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा राहत की विश्वसनीयता, सरकारी जवाबदेही और सार्वजनिक धन के उपयोग से भी जुड़ा है। यदि जांच में रिपोर्ट में उल्लिखित कमियां सही पाई जाती हैं, तो राज्य सरकार पर प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। वहीं यदि सरकार सुधारों का प्रभावी क्रियान्वयन साबित करती है, तो यह उसकी जवाबदेही का महत्वपूर्ण परीक्षण होगा।
बौद्धिक प्रतिकार विश्लेषण
कैग की रिपोर्ट ने सीधे तौर पर किसी घोटाले का अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है, बल्कि आपदा राहत प्रबंधन में गंभीर प्रक्रियागत कमियां, दावों और वास्तविक आकलन के बीच बड़ा अंतर तथा जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित किया है। इसलिए "करोड़ों का घोटाला" जैसे निष्कर्ष तभी स्थापित माने जाएंगे जब जांच एजेंसियां या सक्षम प्राधिकारी अनियमित भुगतान या भ्रष्टाचार की पुष्टि करें। फिलहाल रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश है कि राहत राशि का वितरण अधिक पारदर्शी, सत्यापित और जवाबदेह बनाया जाए।

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