व्हिस्की, टेक्सटाइल, ऑटो और सेवा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ, द्विपक्षीय व्यापार में आएगी नई तेजी
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। लगभग एक वर्ष पहले हस्ताक्षरित इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति देना है। अनुमान है कि इससे आने वाले वर्षों में भारत-ब्रिटेन का द्विपक्षीय व्यापार 25 अरब पाउंड से अधिक बढ़ सकता है।
समझौते के तहत कई उत्पादों पर आयात शुल्क में चरणबद्ध कमी या समाप्ति का प्रावधान किया गया है। भारत के टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और औषधि उद्योग को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है। वहीं भारत में ब्रिटिश व्हिस्की, ऑटोमोबाइल और कुछ अन्य उत्पादों पर शुल्क में चरणबद्ध राहत दी जाएगी।
इस समझौते से सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में भी नए अवसर खुलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी, विदेशी निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार का कहना है कि यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे तथा उद्योग, निवेश और रोजगार को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

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