क्या नियुक्ति का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा?
प्रणव बजाज
भोपाल/इंदौर।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में मनोज मालपानी की नियुक्ति को लेकर उठ रहे प्रश्नों की श्रृंखला में अब चौथा महत्वपूर्ण सवाल नियुक्ति से जुड़े अभिलेखों की उपलब्धता को लेकर है। किसी भी सार्वजनिक नियुक्ति में पारदर्शिता तभी पूरी मानी जाती है, जब उससे संबंधित रिकॉर्ड, प्रक्रिया और निर्णय का आधार आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध हो।
अब तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सभी अभिलेख—जैसे सक्षम प्राधिकारी की अनुशंसा, विचार-विमर्श का रिकॉर्ड (यदि तैयार हुआ हो), तथा चयन का आधार—सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं या नहीं।
उठते हैं ये महत्वपूर्ण प्रश्न
क्या नियुक्ति से संबंधित संपूर्ण अभिलेख सुरक्षित और उपलब्ध हैं?
क्या चयन का आधार लिखित रूप में दर्ज किया गया था?
क्या नियुक्ति संबंधी अनुशंसा और अनुमोदन की प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध है?
यदि कोई नागरिक सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करे, तो क्या ये दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकेंगे?
क्या सरकार पारदर्शिता की दृष्टि से नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े अभिलेख सार्वजनिक करने पर विचार करेगी?
सार्वजनिक संस्थाओं में पारदर्शिता केवल निर्णय लेने से नहीं, बल्कि उस निर्णय के अभिलेखीय आधार को उपलब्ध कराने से भी मजबूत होती है। यदि संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाते हैं, तो नियुक्ति को लेकर उठ रहे अनेक प्रश्नों का तथ्यात्मक समाधान संभव हो सकता है।
नोट: यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और सामान्य प्रशासनिक सिद्धांतों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें किसी व्यक्ति पर किसी प्रकार का अवैध या अनियमित आचरण आरोपित नहीं किया गया है। यदि मनोज मालपानी, मध्य प्रदेश सरकार अथवा संबंधित विभाग अपना पक्ष देना चाहें, तो बौद्धिक प्रतिकार उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
*अगली कड़ी
"क्या मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की नियुक्तियों में अतीत में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई थी? दस्तावेज़ों के आधार पर तुलनात्मक पड़ताल।"
यह चौथी कड़ी पिछली तीन कड़ियों से अलग विषय उठाती है और आगे की दस्तावेज़-आधारित पड़ताल के लिए स्वाभाविक आधार भी तैयार करती है।

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