नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नारको-टेरर फंडिंग से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए जम्मू, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में नौ स्थानों पर छापेमारी की है। कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही जांच के अंतर्गत की गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह नेटवर्क मादक पदार्थों की तस्करी से प्राप्त धन का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने के लिए कर रहा था। जांच में सामने आया कि पाकिस्तान में बैठे संचालकों के निर्देश पर सीमावर्ती क्षेत्रों के माध्यम से हेरोइन भारत पहुंचाई जाती थी और उसके बाद पंजाब तथा अन्य राज्यों तक इसकी आपूर्ति की जाती थी।
ईडी के अनुसार, जांच में पंजाब के सतनाम सिंह और मंजीत सिंह उर्फ मान तथा कुपवाड़ा के सफीर अहमद और कफील अहमद की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि ये लोग सीमा पार बैठे संचालकों के संपर्क में रहकर तस्करी के पूरे नेटवर्क का संचालन करते थे।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि हेरोइन की खेप को ट्रकों के टायरों के भीतर विशेष रूप से तैयार किए गए गुप्त हिस्सों में छिपाकर लाया जाता था। एक मामले में टायर के भीतर से हेरोइन के 30 पैकेट बरामद किए गए। यह मामला पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस और पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर अब ईडी धन शोधन के पहलुओं की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल मादक पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि उससे अर्जित धन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को आर्थिक सहायता पहुंचाने में भी किया जा रहा था। ईडी अब इस नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और अन्य सहयोगियों की जांच कर रही है।
विश्लेषण:
नारको-टेरर फंडिंग भारत की आंतरिक सुरक्षा के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर मादक पदार्थों की तस्करी युवाओं को प्रभावित करती है, वहीं दूसरी ओर उसी धन का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषित करने में किया जाता है। ऐसे मामलों में सीमा सुरक्षा, वित्तीय निगरानी और विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

Post a Comment