अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एफसीएनआर (बी) जमा योजना एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय रिजर्व बैंक की एफसीएनआर (बी) स्वैप विंडो के जरिए बैंकों में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आ रही है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये को सहारा मिल रहा है।
एफसीएनआर (बी) यानी विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक जमा एक ऐसी सावधि जमा योजना है, जिसमें अनिवासी भारतीय अपने डॉलर, पाउंड, यूरो, येन जैसी विदेशी मुद्राओं में भारतीय बैंकों में पैसा जमा कर सकते हैं। इस योजना की खास बात यह है कि जमा राशि और ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में ही मिलते हैं, इसलिए विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का जोखिम जमाकर्ता पर नहीं पड़ता।
जब बड़ी संख्या में अनिवासी भारतीय इस योजना में धन जमा करते हैं, तो भारतीय बैंकों के पास विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ जाती है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलती है और जरूरत पड़ने पर भारतीय रिजर्व बैंक रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में सक्षम होता है। यही कारण है कि एफसीएनआर जमा को रुपये की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्वैप विंडो के तहत भारतीय रिजर्व बैंक बैंकों से विदेशी मुद्रा लेकर उन्हें बदले में रुपये उपलब्ध कराता है। इससे बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने में प्रोत्साहन मिलता है और देश में डॉलर का प्रवाह बढ़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में एफसीएनआर (बी) जमा योजना भारत के लिए विदेशी मुद्रा आकर्षित करने का प्रभावी माध्यम साबित होती है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होता है, बल्कि रुपये की स्थिरता बनाए रखने और बाहरी आर्थिक झटकों का सामना करने में भी मदद मिलती है।

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