क्या नियुक्ति प्रक्रिया पहले जैसी थी या इस बार बदली प्रक्रिया? दस्तावेज़ क्या कहते हैं?
विशेष खोजी रिपोर्ट | प्रणव बजाज
भोपाल/इंदौर। बौद्धिक प्रतिकार की खोजी श्रृंखला के पांचवें एपिसोड में अब सबसे महत्वपूर्ण पहलू की पड़ताल की जा रही है। सवाल केवल मनोज मालपानी की नियुक्ति का नहीं, बल्कि उस पूरी प्रक्रिया का है जिसके आधार पर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में सदस्यों की नियुक्ति की जाती है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी सार्वजनिक नियुक्ति की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या सभी नियुक्तियां एक समान प्रक्रिया, नियम और मानकों के तहत की गई हैं। यदि वर्तमान और पूर्व की नियुक्तियों में प्रक्रिया अलग-अलग दिखाई देती है, तो उसका कारण सार्वजनिक होना भी उतना ही आवश्यक है।
अब दस्तावेज़ों से खोजे जाएंगे इन सवालों के जवा
क्या मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के पूर्व सदस्यों और अध्यक्षों की नियुक्ति भी इसी प्रक्रिया से हुई थी?
क्या पूर्व में आवेदन आमंत्रित किए गए थे या नामांकन के आधार पर नियुक्तियां हुईं?
क्या हर नियुक्ति में पात्रता की जांच और अभिलेखीय परीक्षण का रिकॉर्ड उपलब्ध है?
क्या वर्तमान नियुक्ति में कोई ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई, जो पहले की नियुक्तियों से अलग है?
यदि प्रक्रिया में परिवर्तन हुआ, तो उसका आधार कौन-सा शासनादेश, नियम या वैधानिक प्रावधान है?
बौद्धिक प्रतिकार क्या जांच रहा है?
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी नियुक्ति आदेश।
वक्फ बोर्ड गठन से संबंधित अधिसूचनाएं।
पूर्व बोर्डों की नियुक्ति प्रक्रिया और अभिलेख।
लागू कानूनी प्रावधान और प्रशासनिक नियम।
उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेज़।
जनता के मन में उठते सवाल
यदि नियुक्ति पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है, तो क्या पूरी नियुक्ति प्रक्रिया, संबंधित फाइल, नोटशीट और अनुमोदन रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएंगे?
यदि पूर्व और वर्तमान नियुक्तियों की प्रक्रिया समान है, तो उसे सार्वजनिक करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। यदि कोई अंतर है, तो उसका प्रशासनिक और कानूनी आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।
बौद्धिक प्रतिकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक पदों पर हुई नियुक्तियों की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े तथ्यों को दस्तावेज़ों के आधार पर सामने लाना है।
नोट: यह रिपोर्ट सार्वजनिक अभिलेखों, उपलब्ध नियमों और दस्तावेज़ों के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसमें किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई निष्कर्ष या आरोप नहीं लगाया गया है। यदि श्री मनोज मालपानी, मध्य प्रदेश सरकार, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग या मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड अपना पक्ष देना चाहें, तो बौद्धिक प्रतिकार उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
*कल पढ़िए – एपिसोड 6
"क्या मनोज मालपानी की नियुक्ति से जुड़ी पूरी फाइल सार्वजनिक होगी? सूचना के अधिकार और सरकारी रिकॉर्ड क्या बताते हैं?"
केवल दस्तावेज़... केवल तथ्य... केवल बौद्धिक प्रतिकार।*

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