Top News

करोड़ों का पैचवर्क पहली बारिश में ध्वस्त! इंदौर की सड़कों ने खोली नगर निगम के दावों की पोल, जवाबदेह कौन?

 


प्रणव बजाज


इंदौर। मानसून शुरू होने से पहले इंदौर नगर निगम ने दावा किया था कि शहर की सड़कों को गड्ढामुक्त कर दिया गया है। इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च कर पैचवर्क कराया गया। लेकिन महज दस दिन की बारिश ने इन दावों की परतें उधेड़ दीं। शहर की अनेक प्रमुख और आंतरिक सड़कों पर पैचवर्क उखड़ चुका है, गड्ढे फिर उभर आए हैं और उड़ती धूल ने नागरिकों की परेशानी बढ़ा दी है।


नगर निगम हर वर्ष बरसात से पहले सड़क मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च करता है। सवाल यह है कि यदि मरम्मत तकनीकी मानकों के अनुसार हुई थी, तो पहली ही बारिश में सड़कें क्यों जवाब दे गईं? यदि गुणवत्ता ठीक थी, तो पैचवर्क बहा कैसे? और यदि गुणवत्ता ठीक नहीं थी, तो भुगतान किस आधार पर किया गया?

शहर के विजय नगर, पलासिया, भंवरकुआं, रिंग रोड, एमआर-10, सुपर कॉरिडोर से लेकर कई कॉलोनियों की सड़कों पर गड्ढे, उखड़ा डामर और धूल आम दृश्य बन चुके हैं। दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाओं का जोखिम उठा रहे हैं, जबकि पैदल चलने वालों और स्थानीय व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। सड़क निर्माण और पैचवर्क का कार्य किन ठेकेदारों को दिया गया? गुणवत्ता की जांच किस अधिकारी ने की? भुगतान से पहले क्या स्वतंत्र निरीक्षण हुआ? यदि हुआ, तो दोषपूर्ण कार्य पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

जनता पूछ रही है—


करोड़ों रुपये का पैचवर्क दस दिन भी क्यों नहीं टिक पाया?

क्या घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग हुआ?

दोषी ठेकेदारों पर क्या जुर्माना लगाया जाएगा?

गुणवत्ता प्रमाणित करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी?

हर साल एक ही सड़क पर बार-बार करोड़ों रुपये क्यों खर्च किए जाते हैं?

इंदौर को देश का स्वच्छ शहर कहा जाता है, लेकिन सड़कों की गुणवत्ता पर उठते सवाल अब नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। यदि समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं हुई, तो हर मानसून में जनता को यही परेशानी झेलनी पड़ेगी और सरकारी धन भी इसी तरह बहता रहेगा।

नगर निगम और संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर बौद्धिक प्रतिकार उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post