आयाम बजाज
देश की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा है। यही युवा कल का वैज्ञानिक, सैनिक, शिक्षक, चिकित्सक और प्रशासक बनता है। लेकिन जब यही युवा राजनीतिक नारों, उग्र आंदोलनों और टकराव की राजनीति का माध्यम बन जाता है, तब सबसे बड़ा नुकसान उसी के भविष्य का होता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि माता-पिता भी अपने बच्चों को समझाएं कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना अधिकार है, लेकिन हिंसा, तोड़फोड़ और कानून हाथ में लेना किसी भी स्थिति में उचित नहीं हो सकता। विरोध का अधिकार संविधान देता है, लेकिन देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का अधिकार किसी को नहीं देता।
पिछले वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है। आर्थिक विकास, आधारभूत ढांचा, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कूटनीति और निवेश जैसे क्षेत्रों में देश की छवि बेहतर हुई है। ऐसी स्थिति में यदि किसी आंदोलन के दौरान हिंसा, अराजकता या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो उसका असर देश की प्रतिष्ठा पर भी पड़ता है।
राजनीतिक दलों को भी आत्ममंथन करना चाहिए। लोकतंत्र में विरोध आवश्यक है, लेकिन यदि युवा केवल राजनीतिक संघर्ष का माध्यम बन जाएं, तो सबसे अधिक नुकसान उनके भविष्य का होता है। देश का युवा पढ़ाई, शोध, रोजगार और नवाचार की दिशा में आगे बढ़े, यही राष्ट्रहित में है।
माता-पिता, शिक्षक और समाज की भी जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को संयम, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रहित का महत्व समझाएं। जोश जरूरी है, लेकिन जोश के साथ विवेक भी उतना ही आवश्यक है।
प्रश्न किसी एक आंदोलन का नहीं है, बल्कि यह है कि क्या हम अपने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं या उन्हें राजनीतिक टकराव का हिस्सा बना रहे हैं?
राष्ट्र पहले, राजनीति बाद में—यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति होनी चाहिए।

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