नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के इस बयान के बाद कि दुनिया में इस्लाम तेजी से फैल रहा है, भारत में मुस्लिम आबादी और उसकी वृद्धि दर को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि भारत में सभी प्रमुख धार्मिक समुदायों की जनसंख्या वृद्धि दर समय के साथ घट रही है।
भारत में धर्म आधारित अंतिम आधिकारिक जनगणना 2011 में हुई थी। इसके अनुसार देश की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 79.8 प्रतिशत, मुसलमानों की 14.2 प्रतिशत, ईसाइयों की 2.3 प्रतिशत, सिखों की 1.7 प्रतिशत, बौद्धों की 0.7 प्रतिशत और जैन समुदाय की 0.4 प्रतिशत थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या वृद्धि दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) सहित विभिन्न अध्ययनों से संकेत मिलता है कि सभी समुदायों में प्रजनन दर लगातार घट रही है और उनके बीच का अंतर भी कम हो रहा है।
जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा, शहरीकरण, महिलाओं की साक्षरता, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और आर्थिक स्थिति जैसे कारक जनसंख्या वृद्धि को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक आंकड़ों और विश्वसनीय अध्ययनों को आधार बनाना आवश्यक है।
जनगणना के नए आंकड़े जारी होने के बाद ही देश की धार्मिक संरचना और जनसंख्या वृद्धि की वर्तमान तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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