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खजराना सिविल अस्पताल के नाम पर करोड़ों की खरीदारी? प्रशासन बोला— अभी अस्पताल ही मंजूर नहीं, फिर खरीद किस बात की?

 

इंदौर। खजराना में प्रस्तावित 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल को लेकर उठे सवालों के बीच जिला प्रशासन ने सफाई जारी करते हुए कहा है कि अस्पताल परियोजना से संबंधित सभी कार्य शासन के नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही होंगे। प्रशासन के अनुसार अभी अस्पताल के लिए भूमि का स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरण और भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति शेष है। इसके बाद ही निर्माण संबंधी प्रक्रिया शुरू होगी।


यही स्पष्टीकरण कई नए सवाल भी खड़े करता है। यदि अस्पताल का निर्माण अभी स्वीकृत ही नहीं हुआ, तो फिर अस्पताल के नाम पर दवाओं, चिकित्सा उपकरणों अथवा अन्य सामग्रियों की खरीद से जुड़ी चर्चाएं कैसे सामने आईं? यदि किसी स्तर पर खरीद प्रक्रिया शुरू हुई थी, तो उसका आधार क्या था? यदि नहीं हुई, तो ऐसी जानकारी सार्वजनिक क्षेत्र में कैसे पहुंची? इन सवालों के स्पष्ट उत्तर सामने आना अभी बाकी हैं।

इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सभी कार्य वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार ही होंगे। प्रशासनिक स्तर पर यह भी कहा गया है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई शासन की स्वीकृतियों के बाद ही की जाएगी।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रस्तावित अस्पताल की फाइल किस स्तर पर है, किस-किस विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की है और क्या भविष्य में इस परियोजना की संपूर्ण प्रशासनिक एवं वित्तीय जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

जिन अधिकारियों की इस परियोजना में प्रशासनिक भूमिका बताई जा रही है, उनमें इंदौर कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), सिविल सर्जन, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारी तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारी शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर किसी अधिकारी पर अनियमितता सिद्ध नहीं हुई है और न ही किसी के विरुद्ध इस मामले में आधिकारिक कार्रवाई की घोषणा की गई है।

बौद्धिक प्रतिकार की मांग:

यदि अस्पताल परियोजना को लेकर किसी भी स्तर पर खरीद, निविदा या प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई गई है, तो उसकी पूरी फाइल, स्वीकृतियां और वित्तीय विवरण सार्वजनिक किए जाएं, ताकि सभी संदेहों का तथ्यात्मक समाधान हो सके और पारदर्शिता बनी रहे।

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