विशेष संवाददाता | नई दिल्ली
देशभर में छात्र आंदोलन और प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि सरकार में "थोड़ी भी शर्म बची है" तो केंद्रीय गृह मंत्री से तत्काल इस्तीफा लिया जाना चाहिए।
खरगे ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है और सरकार की जिम्मेदारी संवाद स्थापित करने की है, न कि टकराव का माहौल बनाने की।
कांग्रेस का आरोप है कि छात्र आंदोलनों से जुड़े घटनाक्रमों के दौरान प्रशासनिक कार्रवाई और कानून-व्यवस्था के प्रबंधन में गंभीर चूक हुई है। इसी आधार पर पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री की राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे पर राजनीति कर रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार का दायित्व है और किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस घटनाक्रम के बाद संसद और राष्ट्रीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार विपक्ष की मांगों का क्या जवाब देती है और छात्र आंदोलन को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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