नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों पर भी पड़ा है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
कंपनियों के वित्तीय परिणामों के अनुसार, इस अवधि में एचपीसीएल को लगभग 12,265 करोड़ रुपये और बीपीसीएल को करीब 3,962 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। इसकी प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और लंबे समय तक पेट्रोल, डीजल तथा रसोई गैस की बिक्री लागत से कम कीमत पर करना रही।
विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू खुदरा ईंधन कीमतों में तत्काल समान अनुपात में वृद्धि नहीं होने से तेल कंपनियों के लाभ पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा आयात लागत और विपणन मार्जिन पर भी इसका असर पड़ा।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर आगे भी दबाव रह सकता है। हालांकि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल और सरकार की मूल्य निर्धारण नीति इन कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित करेगी।

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