नई दिल्ली/लंदन। भारत की अग्रणी बंदरगाह कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड ब्रिटेन की सबसे बड़ी बंदरगाह परिचालन कंपनी एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स (एबीपी) के अधिग्रहण की दौड़ में शामिल होने पर विचार कर रही है। यदि यह सौदा सफल होता है तो गौतम अडानी का वैश्विक बंदरगाह कारोबार नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, एबीपी में नियंत्रक हिस्सेदारी रखने वाले कनाडा के दो पेंशन फंड अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। इसी कारण कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ अडानी समूह भी बोली लगाने की संभावना तलाश रहा है।
एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स यूनाइटेड किंगडम के 21 प्रमुख बंदरगाहों का स्वामित्व और संचालन करती है। कंपनी देश के समुद्री व्यापार, आयात-निर्यात और माल ढुलाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा एबीपी अपतटीय पवन ऊर्जा (ऑफशोर विंड) परियोजनाओं के लिए भी प्रमुख साझेदार मानी जाती है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में उसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अडानी पोर्ट्स यह अधिग्रहण करने में सफल रहती है, तो उसे यूरोप के समुद्री व्यापार नेटवर्क में मजबूत उपस्थिति मिलेगी। इससे समूह की वैश्विक कार्गो क्षमता, बंदरगाह परिचालन और लॉजिस्टिक्स कारोबार का तेजी से विस्तार होगा तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति और मजबूत होगी।
हालांकि अभी तक अडानी समूह या एबीपी की ओर से संभावित बोली पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सौदे का आकार कई अरब डॉलर का हो सकता है और इस पर दुनिया की कई बड़ी आधारभूत संरचना निवेश कंपनियों की भी नजर है।

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