वॉशिंगटन। अमेरिकी सीनेट ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने वाले द्विदलीय विधेयक को महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक मंजूरी दे दी है। इस विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों के खिलाफ 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। यह अभी अंतिम कानून नहीं बना है; इसके लिए आगे भी संसदीय प्रक्रिया और प्रतिनिधि सभा की मंजूरी आवश्यक होगी।
संशोधित प्रस्ताव के अनुसार, यह प्रावधान मुख्य रूप से भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान जैसे रूस के प्रमुख कच्चे तेल खरीदार देशों को प्रभावित कर सकता है। पहले के मसौदे में 500 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रस्ताव था, जिसे घटाकर अधिकतम 100 प्रतिशत किया गया है। साथ ही, कुछ परिस्थितियों में अमेरिकी राष्ट्रपति को छूट देने का अधिकार भी प्रस्तावित किया गया है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का बड़ा आयातक बना हुआ है। अमेरिका का तर्क है कि रूस की ऊर्जा आय पर दबाव डालकर उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर किया जा सकता है। वहीं भारत लगातार कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकताओं के आधार पर होती है।
यदि यह विधेयक अंततः कानून बनता है और टैरिफ लागू किए जाते हैं, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों, ऊर्जा आयात और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है और कानून लागू होने से पहले इसमें संशोधन की भी संभावना बनी हुई है।

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