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कुर्सी का कुंभ: चुनाव दूर, लेकिन कांग्रेस में 'मुख्यमंत्री' पहले से तैयार!

 

प्रणव बजाज

जनता मुद्दे खोज रही है, नेता अध्यक्ष की कुर्सी; चुनाव से पहले ही 'अपनों' से घिर गई कांग्रेस

पंजाब में चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन कांग्रेस के गलियारों में ऐसा माहौल है जैसे मतदान कल ही होना हो। फर्क सिर्फ इतना है कि मुकाबला विपक्ष से कम और अपनी ही पार्टी के नेताओं के बीच ज्यादा दिखाई दे रहा है। जनता महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की चिंता कर रही है, जबकि पार्टी के कई दिग्गज अध्यक्ष की कुर्सी पर नज़रें टिकाए बैठे हैं।


चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री का गुट संगठन में बड़ी भूमिका चाहता है। दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व संतुलन बनाने में जुटा है। ऐसे में कांग्रेस की राजनीति किसी चुनावी रणनीति से ज्यादा "कुर्सी बचाओ और कुर्सी पाओ" अभियान जैसी दिखाई दे रही है।

व्यंग्य यही है कि जिस पार्टी को विरोधियों के खिलाफ रणनीति बनानी चाहिए, वह पहले अपने ही नेताओं को मनाने की रणनीति तैयार कर रही है। लगता है पंजाब कांग्रेस में चुनाव से पहले सबसे कठिन लड़ाई जनता का भरोसा जीतने की नहीं, बल्कि पार्टी कार्यालय की सबसे बड़ी कुर्सी तक पहुंचने की है।

बौद्धिक प्रतिकार की कलम से:

"जनता पूछ रही है— घोषणा-पत्र कब आएगा?

नेता पूछ रहे हैं— अध्यक्ष कौन बनेगा?"

जब पार्टी के भीतर ही चुनावी रण छिड़ जाए, तो विपक्ष को ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती।

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