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जेल में सरगना, बाहर चलता गैंग! आखिर कितना बड़ा है लॉरेंस बिश्नोई का अपराध नेटवर्क और क्यों खत्म नहीं हो रहा 'गुंडाराज

 


प्रणव बजाज

हरियाणा में पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के संयुक्त अभियान में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो कथित शार्पशूटर मारे गए। पुलिस के अनुसार दोनों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था और वे हाल की एक हत्या के मामले में वांछित थे। मुठभेड़ में एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ। 


लेकिन सवाल यह है कि जब गैंग का सरगना वर्षों से जेल में बंद है, तब भी उसका नेटवर्क कैसे लगातार सक्रिय है?

जेल से बाहर तक फैला नेटवर्क

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और विभिन्न राज्यों की पुलिस की जांच के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क अब केवल पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात सहित कई राज्यों तक फैला बताया जाता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, गैंग के सहयोगी विदेशों से भी कथित रूप से संचालन और समन्वय करते हैं। 

गैंग कैसे करता है काम?

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम करता है—

रंगदारी (Extortion) के लिए धमकी भरे कॉल और सोशल मीडिया का उपयोग।

शार्पशूटरों को अलग-अलग राज्यों में सक्रिय रखना।

एन्क्रिप्टेड या कोडेड संचार माध्यमों से संपर्क।

फर्जी पहचान और अलग-अलग मॉड्यूल के जरिए काम, ताकि पूरा नेटवर्क एक साथ उजागर न हो।

विदेश में बैठे सहयोगियों के माध्यम से कथित समन्वय और वित्तीय गतिविधियां। 

किन हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़ा नाम?

लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम कई चर्चित मामलों में सामने आया है। इनमें पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या, अभिनेता सलमान खान को धमकियां, मुंबई के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में कथित जिम्मेदारी का दावा तथा कई राज्यों में रंगदारी और फायरिंग की घटनाएं शामिल हैं। अलग-अलग मामलों में जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं और सभी मामलों में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष संबंधित अदालतों में लंबित हैं। 

क्या खत्म हो पाएगा 'गुंडाराज'?

हाल के महीनों में पुलिस ने गैंग के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया है और कई मुठभेड़ों में कार्रवाई भी की है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शार्पशूटरों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। जब तक गैंग के आर्थिक स्रोत, हथियारों की सप्लाई, डिजिटल नेटवर्क और अंतरराज्यीय मॉड्यूल को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाता, तब तक ऐसे संगठित अपराध नेटवर्क नए सदस्यों के सहारे दोबारा सक्रिय हो सकते हैं। 

निष्कर्ष

हरियाणा में दो कथित शूटरों के मारे जाने से पुलिस को एक बड़ी सफलता जरूर मिली है, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि संगठित अपराध अब केवल स्थानीय गैंगवार का मामला नहीं रह गया। डिजिटल संचार, अंतरराज्यीय नेटवर्क और विदेशों तक फैले संपर्कों ने ऐसे गिरोहों को अधिक जटिल बना दिया है। ऐसे में कानून-व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे अपराध तंत्र को जड़ से समाप्त करना है।

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