भोपाल। मध्य प्रदेश के लगभग आधे हिस्से में मानसून की कमजोर रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड और मध्य क्षेत्र के कई जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका सबसे अधिक असर खरीफ की प्रमुख फसलों सोयाबीन, मक्का और मूंगफली पर दिखाई देने लगा है। खेतों में नमी लगातार कम हो रही है, जिससे फसलों का विकास रुक गया है और कई स्थानों पर पौधे पीले पड़ने लगे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। कई किसानों ने दोबारा बुवाई की आशंका भी जताई है, जिससे उनकी लागत और बढ़ जाएगी। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं, वहां स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है।
उधर, कृषि विभाग ने किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का उपयोग करने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है, लेकिन व्यापक और लगातार वर्षा की आवश्यकता बताई जा रही है। किसानों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हैं, क्योंकि समय पर बारिश नहीं होने पर खरीफ सीजन की पूरी तस्वीर बदल सकती है।

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