ड्राफ्ट तैयार, भोपाल-इंदौर समेत मध्य, पश्चिमी और ग्वालियर-चंबल के मेडिकल कॉलेज उज्जैन के अधीन आएंगे
भोपाल। मध्य प्रदेश की एकमात्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय को दो भागों में विभाजित करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। राज्य सरकार ने इसका प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। इस बदलाव के बाद चिकित्सा शिक्षा का प्रशासन दो विश्वविद्यालयों के माध्यम से संचालित होगा।
नए प्रस्ताव के अनुसार भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-चंबल, मालवा-निमाड़, नर्मदापुरम और सागर संभाग के मेडिकल कॉलेज उज्जैन मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधीन आएंगे। वहीं महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध रहेंगे।
सरकार का मानना है कि दो विश्वविद्यालय बनने से मेडिकल कॉलेजों का प्रशासनिक कार्यभार कम होगा, परीक्षाओं, परिणामों, संबद्धता और शैक्षणिक गतिविधियों में तेजी आएगी तथा चिकित्सा शिक्षा का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
किस विश्वविद्यालय के अधीन कौन से क्षेत्र?
उज्जैन मेडिकल यूनिवर्सिटी
भोपाल, इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम, मंदसौर, नीमच
खरगोन, खंडवा, बड़वानी, बुरहानपुर
ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर, गुन
भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, राजगढ़
नर्मदापुरम, बैतूल तथा सागर संभाग के जिल
जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी
जबलपुर, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली
शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, मंडला, बालाघाट
सिवनी, छिंदवाड़ा, पन्ना, टीकमगढ़ सहित महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के अन्य जिले
सरकार के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने पर राज्य पर प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। हालांकि, प्रशासनिक दक्षता और चिकित्सा शिक्षा के बेहतर संचालन को देखते हुए इसे महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।
यदि मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल जाती है, तो मध्य प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में यह पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा संस्थागत बदलाव होगा।

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