प्रणव बजाज
भोपाल/दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव को भारतीय जनता पार्टी ने प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है। टिकट भले ही डॉ. नरोत्तम मिश्रा को नहीं मिला, लेकिन चुनावी रणनीति की कमान उन्हें सौंपकर पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि दतिया के रण में सबसे बड़ा भरोसा अब भी उन्हीं पर है।
भाजपा ने 32 सदस्यीय चुनाव अभियान एवं संचालन समिति का गठन कर चुनावी मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। शुक्रवार को दतिया में चुनाव कार्यालय और मीडिया सेंटर का शुभारंभ हुआ, जिसके साथ बूथ प्रबंधन, मतदाता संपर्क और प्रचार अभियान को तेज करने की रणनीति पर काम शुरू हो गया।
टिकट वितरण के बाद भाजपा को दतिया में कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। कई स्थानों पर विरोध भी देखने को मिला। ऐसे माहौल में डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले का समर्थन करते हुए कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनाव लड़ने की अपील की। अब भाजपा नेतृत्व की नजर इस बात पर है कि क्या नरोत्तम मिश्रा अपनी संगठनात्मक पकड़ और जनाधार के दम पर नाराजगी को पूरी तरह खत्म कर पाएंगे।
दूसरी ओर कांग्रेस भी इस उपचुनाव को सत्ता और संगठन दोनों के लिए अहम मानते हुए पूरी ताकत झोंक रही है। ऐसे में दतिया का मुकाबला केवल दो उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि दोनों दलों की राजनीतिक साख की परीक्षा भी बन गया है।
दतिया का यह उपचुनाव तय करेगा कि भाजपा की चुनावी रणनीति और नरोत्तम मिश्रा की संगठनात्मक ताकत कितनी प्रभावी साबित होती है, या फिर कांग्रेस इस मौके को सत्ता पक्ष के खिलाफ जनमत में बदलने में सफल रहती है।

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