रायपुर। का 70 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद रायपुर स्थित एम्स में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया। तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय गायन शैली और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से पंडवानी लोककला को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों तक पहुंचाकर उसे वैश्विक पहचान दिलाई।
तीजन बाई ने महाभारत की कथाओं को पंडवानी शैली में जीवंत प्रस्तुत कर लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। सीमित संसाधनों से शुरुआत करने वाली इस महान कलाकार ने अपनी प्रतिभा और संघर्ष के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सांस्कृतिक विरासत का गौरव बढ़ाया। उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।
प्रधानमंत्री ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय लोककला को विश्वभर में नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि उनकी कला, समर्पण और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।
तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। कला जगत, साहित्यकारों, राजनीतिक नेताओं और उनके लाखों प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनकी आवाज़ भले ही अब मौन हो गई हो, लेकिन पंडवानी की दुनिया में उनका नाम हमेशा अमर रहेगा।

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