नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का खतरा कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। एक ही दिन में कच्चे तेल की कीमत करीब 9 प्रतिशत टूटकर 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। इसे हाल के समय की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावटों में माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध की आशंका कम होने से तेल आपूर्ति बाधित होने का डर घटा है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें नीचे आई हैं। कच्चे तेल के सस्ता होने से भविष्य में पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत पर दबाव कम हो सकता है। इससे महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि राहत अभी पूरी तरह तय नहीं मानी जा सकती। समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। यदि पश्चिम एशिया में फिर तनाव बढ़ता है या आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें दोबारा बढ़ सकती हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक नीचे बने रहते हैं, तो सरकार और तेल कंपनियों के पास घरेलू ईंधन कीमतों में राहत देने की गुंजाइश बढ़ सकती है। फिलहाल बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और वैश्विक तेल आपूर्ति पर बनी हुई है।

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